आजम खान (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

सपा नेता आजम खान की बढ़ीं मुश्किलें, तनखैया अफसर मामले में कोर्ट ने खारिज की अपील; दो साल की सजा बरकरार

Uttar Pradesh News: तनखैया अधिकारी वाले बयान मामले में कोर्ट ने आजम खान की याचिका खारिज कर दी है। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दो साल की सजा और जुर्माने का आदेश बरकरार रखा है।

अमन मौर्या

Azam Khan Tankhaiya Officer Case: समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को तनखैया अधिकारी वाले बयान पर कोर्ट से तगड़ा झटका मिला है। 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान एक चुनावी रैली में अधिकारियों को तनखैया बताने के मामले में पूर्व मंत्री आजम खान को कोर्ट ने राहत नहीं दी है। इस मामले में उन्हें पहले ही निचली अदालत दो वर्ष की सजा सुना चुकी है।

इस फैसले के खिलाफ आजम खान की तरफ से एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट को अपील दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। स्पेशल कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही बताया और सजा के साथ जुर्माने वाले आदेश को बरकरार रखा है।

अवर न्यायालय का आदेश बरकरार

अभियोजन अधिकारी सीमा राणा ने कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बीतचीत की। उन्होंने बताया कि देखिए, यह एक अपील फाइल की गई थी विशेष न्यायाधीश, एमपी-एमएलए, सेशन कोर्ट, डॉ. विजय कुमार की कोर्ट में। जिसमें जो दोषसिद्धि 16.05.2026 को माननीय अवर न्यायालय द्वारा की गई थी, उस निर्णय के विरुद्ध यह अपील की गई थी। जिसमें आज मोहम्मद आजम खान की अपील को निरस्त किया गया है और जो अवर न्यायालय का आदेश है, उसे बरकरार रखा गया है।

आजम खान के वकील ने दी जानकारी

वहीं, सपा नेता आजम खान के वकील नासिर सुल्तान ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि 29-03-2019 की घटना दिखाते हुए फैसल लाला द्वारा मोहम्मद आजम खान के खिलाफ थाना कोतवाली में 2 अप्रैल 2019 को मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने मोहम्मद आजम खान साहब को बाइज्जत बरी किया था।

उन्होंने कहा कि उस दोषमुक्ति के फैसले के खिलाफ वादी फैसल लाला द्वारा सेशन कोर्ट में क्रिमिनल अपील फाइल की गई थी। उस अपील को सेशन कोर्ट द्वारा आज खारिज कर दिया गया है। और जो लोअर कोर्ट का दोषमुक्ति का फैसला था, बरी करने का जो फैसला था, वह बरकरार रहा। आजम खान इस मुकदमे में बरी हैं।

2019 लोकसभा चुनाव का है मामला

मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भोट थाना क्षेत्र के मनकरा गांव में की है। चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आजम खान ने विवादित बयान दिया था। आजम के इस विवादित बयान को प्रशासन ने आचार संहिता का उल्लंघन माना था। इस बयान के बाद तत्कालीन उप जिलाधिकारी घनश्याम त्रिपाठी ने आजम खान के खिलाफ भोट थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 16 मई 2026 को आजम खां को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने कई धाराओं में दो-दो वर्ष की जेल की सजा और प्रत्येक धारा में 5-5 हजार रुपये का जुर्माने लगाया गया था। आजम खां ने निचली कोर्ट के फैसले को एमपी-एमएलए विशेष अदालत (सेशन ट्रायल) में चुनौती दी थी।

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