Dog Rescue Operation In Agra: जब मदद के लिए कई दरवाजे खटखटाए गए, लेकिन कोई रास्ता नजर नहीं आया, तब ‘कैस्पर होम’ के एक वॉलंटियर ने अपनी जान की परवाह किए बिना एक बेजुबान की जिंदगी बचाने का बीड़ा उठाया। मामला शाहगंज इलाके का है, जहां एक बेहद जर्जर खाली प्लॉट में बने बड़े और गहरे गड्ढे में एक कुत्ता गिर गया था। गड्ढा इतना खतरनाक था कि उसमें उतरना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं था। ऊपर से जर्जर दीवारों और मलबे के गिरने का खतरा भी बना हुआ था।
‘कैस्पर होम’ की संस्थापिका विनीत अरोड़ा के मुताबिक, कुत्ते के गड्ढे में गिरने की सूचना मिलने के बाद कई नंबरों पर मदद के लिए संपर्क किया गया। उनका कहना है कि दोपहर करीब तीन बजे के बाद हेल्पलाइन और यहां तक कि 112 पर भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तत्काल मदद नहीं मिल सकी। दूसरी ओर, जर्जर प्लॉट की स्थिति को देखते हुए कोई भी व्यक्ति गहरे गड्ढे में उतरने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं था।
ऐसे मुश्किल हालात में ‘कैस्पर होम’ के स्टाफ मेंबर और सबसे पुराने एवं समर्पित वॉलंटियर ऋषभ सक्सेना आगे आए। बारिश के मौसम और लगातार बने मलबा गिरने के खतरे के बावजूद ऋषभ गड्ढे में उतरे और काफी मशक्कत के बाद कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के बाद कुत्ते को उसी कॉलोनी में रहने वाले उन लोगों के पास सुरक्षित पहुंचाया गया, जो लंबे समय से उसे खाना खिलाते हैं। इस साहसिक रेस्क्यू के बाद ‘कैस्पर होम’ की टीम ने ऋषभ के जज्बे की सराहना की है।
इसी बीच SPCA की नई कमेटी को लेकर भी महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। ‘कैस्पर होम’ की संस्थापिका विनीत अरोड़ा, जो नई SPCA कमेटी में शामिल हैं, ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डीके पांडे के समक्ष पशुओं की सुरक्षा और रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ी मांगें रखीं।
विनीत अरोड़ा ने मांग की कि पशु क्रूरता की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष टीम गठित की जाए और प्रशिक्षित सदस्यों वाली एक समर्पित रेस्क्यू टीम भी बनाई जाए, ताकि घायल या संकट में फंसे पशुओं को समय पर मदद मिल सके। इसके साथ ही SPCA के गाय आश्रय स्थल में कुत्तों के लिए भी अलग शेल्टर की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया गया।
बताया गया है कि सीवीओ डीके पांडे ने इन सुझावों को आगामी बैठक में रखने का आश्वासन दिया है। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि बेजुबान जानवरों के लिए आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू की व्यवस्था कितनी मजबूत है? जब तक सरकारी या संस्थागत मदद पहुंचे, तब तक अक्सर स्वयंसेवी संगठन और उनके वॉलंटियर ही मोर्चा संभालते नजर आते हैं। शाहगंज की यह घटना जहां ऋषभ के साहस की मिसाल है, वहीं शहर में एक व्यवस्थित और प्रशिक्षित पशु रेस्क्यू नेटवर्क की जरूरत को भी सामने लाती है।