ज्ञापन देते हुए कांग्रेस नेता (सोर्स- नवभारत लाइव)
आगरा

आगरा नगर निगम में कांग्रेस का हल्ला बोल, चार मकानों के ध्वस्तीकरण पर उठाए सवाल

Garib Nagar Agra: आगरा के गरीब नगर में चार मकानों के ध्वस्तीकरण को लेकर कांग्रेस ने नगर निगम में प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने मुआवजे, पुनर्वास और कार्रवाई की जांच की मांग उठाई।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Highlights:

  • ‘नगर आयुक्त होश में आओ’ और ‘नगर आयुक्त हाय-हाय’ के नारों से गूंजा निगम परिसर

  • अमित सिंह ने मांगा कार्रवाई का हिसाब

  • 24 अक्टूबर तक जांच का आश्वासन

  • कांग्रेस ने पीड़ितों को मुआवजा और रहने-खाने की व्यवस्था देने की उठाई मांग

Agra Poori Nagar Demolition: नगर निगम के वार्ड 16 स्थित गरीब नगर में चार मकानों के ध्वस्तीकरण का मामला गरमा गया है। कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने नगर निगम परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘नगर आयुक्त होश में आओ’ और ‘नगर आयुक्त हाय-हाय’ के नारे लगाए गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निगम की टीम ने बिना नोटिस और अनुमति की प्रक्रिया स्पष्ट किए चार मकानों को ध्वस्त कर दिया, जिससे प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने स्थानीय पार्षद पर प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई करवाने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि चार मकानों को निशाना बनाने के पीछे पार्षद का दबाव था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नगर निगम प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है।

पार्षद के दबाव में कार्रवाई का आरोप

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गरीब नगर में चार मकानों को गिराए जाने से परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की टीम ने प्रभावित लोगों को पहले नोटिस नहीं दिया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला।

अमित सिंह ने स्थानीय पार्षद पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि कथित तौर पर मैरिज होम बनाने की मंशा से इन मकानों को ध्वस्त कराया गया। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के प्रभाव में आकर गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मैरिज होम बनाने की मंशा और पार्षद की भूमिका से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कांग्रेस ने नगर निगम से पूछे चार सवाल

प्रदर्शन के दौरान अमित सिंह ने मौके पर मौजूद अपर नगर आयुक्त के सामने कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए। कांग्रेस ने नगर निगम से लिखित जवाब मांगते हुए पूछा कि चार मकानों को ध्वस्त करने का आदेश किसने दिया, प्रभावित परिवारों को नोटिस किसने जारी किया, कार्रवाई के लिए मौके पर कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे तथा संबंधित जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसके पास है।

कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया कि यदि मकानों को हटाने की कार्रवाई जरूरी थी तो प्रभावित परिवारों को अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। पार्टी ने चार मकानों को ही ध्वस्त किए जाने के आधार और कार्रवाई की परिस्थितियों को भी स्पष्ट करने की मांग की।

अमित सिंह के मुताबिक, अपर नगर आयुक्त ने इन सवालों पर जवाब देने के लिए 24 अक्टूबर तक का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है। पार्टी किसी भी जनप्रतिनिधि के दबाव या कथित मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेगी।

मुआवजे के साथ पुनर्वास की मांग

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने मांग की कि जिन परिवारों के मकान ध्वस्त किए गए हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक नगर निगम उनके आवास, भोजन और पेयजल की जिम्मेदारी उठाए।

अमित सिंह ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों के लिए रहने और खाने-पीने की व्यवस्था नहीं की गई तो कांग्रेस इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस कार्यकर्ता नगर आयुक्त संतोष वैश्य के कार्यालय में ही रहने को मजबूर होंगे।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने साफ किया कि वे पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। विरोध प्रदर्शन के बीच निगम परिसर में हलचल बढ़ गई। स्थिति को देखते हुए स्थानीय पुलिस को भी सूचना दी गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि पुलिस बल बढ़ाने से भी उनका विरोध समाप्त नहीं होगा और वे पीड़ितों की आवाज उठाते रहेंगे।

अपर नगर आयुक्त बोले- जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

मामले में अपर नगर आयुक्त ने मीडिया को बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद प्रकरण का संज्ञान लिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई किसके निर्देश पर की गई और इसके पीछे क्या कारण थे।

उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों से बातचीत की जा रही है और उनसे जमीन से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तथा पीड़ितों के लिए रहने-खाने की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

अब इस मामले में 24 अक्टूबर तक जांच और कार्रवाई को लेकर नगर निगम प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि चार मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई किन आदेशों के आधार पर हुई और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिल सकेगी।

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