बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती व भतीजे आकाश आनंद (डिजाइन फोटो) 
उत्तर प्रदेश

बसपा की उड़ान के लिए 'आकाश' जरूरी, माफी क्यों बन गई मायावती की मज़बूरी? यहां जानिए इनसाइड स्टोरी

मायावती ने आकाश को माफी देकर एक और मौका देने का ऐलान किया, लेकिन आकाश को न तो कोई पद दिया गया और न ही कोई राजनीतिक दर्जा। जिसके बाद सवाल उठना लाजमी है कि क्या मायावती ने किसी मजबूरी में आकाश को वापस लिया है?

अभिषेक सिंह

लखनऊ: बसपा प्रमुख मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बीच राजनीतिक रिश्ते फिर से पटरी पर आ गए हैं। अंबेडकर जयंती से एक दिन पहले आकाश आनंद ने सार्वजनिक तौर पर मायावती से माफी मांगी और कुछ घंटे बाद ही मायावती ने बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें माफ कर दिया। इस तरह बसपा से निकाले जाने के 41 दिन बाद आकाश आनंद फिर से पार्टी में वापस आ गए हैं।

मायावती ने 3 मार्च को आकाश आनंद को बसपा से निकाल दिया था। इसके पीछे की वजह आकाश आनंद का अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक सलाह पर चलना था। बसपा से निकाले जाने के सवा महीने बाद आकाश ने रविवार को मायावती को पत्र लिखकर माफी मांगने के साथ ही फिर से बसपा में काम करने की इच्छा जताई और कहा कि पार्टी हित में वह अब अपने रिश्तेदारों खासकर ससुराल वालों की नहीं सुनेंगे।

आकाश के माफी मांगने के करीब ढाई घंटे बाद मायावती ने भी उन्हें माफ कर दिया और पार्टी में वापसी का एक और मौका देने का ऐलान किया, लेकिन आकाश को न तो कोई पद दिया गया और न ही कोई राजनीतिक दर्जा। जिसके बाद सवाल उठना लाजमी है कि क्या मायावती ने किसी मजबूरी में आकाश को वापस लिया है?

पहली ही लिखी जा चुकी थी पटकथा

आकाश आनंद की बीएसपी में घर वापसी की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी, जिसे सोची-समझी रणनीति के तहत अंबेडकर जयंती से एक दिन पहले लागू किया गया है। मायावती ने 3 मार्च को आकाश आनंद को बीएसपी से निष्कासित करने का आदेश दिया था, जिसके बाद आकाश आनंद ने चुप्पी साध ली थी, लेकिन पर्दे के पीछे बिगड़े रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें की जा रही थीं। बीएसपी सूत्रों की मानें तो पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद आकाश आनंद ने अपने पिता आनंद कुमार से पूरे मामले पर बात की और उन्हें समझ में आया कि वाकई अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के बहकावे में आकर उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। पिता-पुत्र के बीच सब ठीक होने के बाद ही आनंद कुमार ने बहन मायावती से इस मुद्दे पर बात की।

बसपा सुप्रीमो के सामने झुके आकाश

इतना ही नहीं बीएसपी के चार बड़े नेताओं ने भी मायावती को समझाया कि आकाश आनंद बच्चा है, अशोक सिद्धार्थ ने उसे गुमराह किया है। इसमें आकाश आनंद की कोई गलती नहीं है और उसे पार्टी से निष्कासित करके आपने उसे बड़ी सजा दी है। इसके बाद आकाश आनंद ने मायावती से फोन पर बात की और अपनी गलती स्वीकार करते हुए पार्टी में दोबारा काम करने का मौका मांगा।

बसपा मुखिया मायावती (सोर्स- सोशल मीडिया)

आकाश आनंद को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए बीएसपी की उतनी ही जरूरत है जितनी मायावती को आकाश आनंद की। इस तरह दोनों एक दूसरे के लिए राजनीतिक रूप से मजबूर और जरूरी हैं। मायावती यह अच्छी तरह जानती हैं कि बीएसपी का भविष्य किसके हाथों में सुरक्षित रहेगा।

क्या है घर वापसी की इनसाइड स्टोरी?

मायावती यह अच्छी तरह समझती हैं कि उनके अलावा अगर कोई दलित समुदाय को बीएसपी में इकट्ठा करने की ताकत रखता है तो वह आकाश आनंद ही हैं। दलित युवाओं में आकाश की अच्छी पकड़ है। बीएसपी से निकाले जाने के बाद से ही आकाश की वापसी की लगातार मांग हो रही थी। इसके अलावा वह मायावती की गोद में खेलकर बड़े हुए हैं और उनकी उंगली पकड़कर ही राजनीतिक राह पर चलना सीखा है।

आकाश के हाथों में बसपा का भविष्य!

मायावती भी आकाश के हाथों में बीएसपी का भविष्य देखती हैं। इस तरह मायावती ज्यादा दिनों तक आकाश से नाराज नहीं रह सकती थीं, जिसके लिए उनकी घर वापसी का रास्ता निकाला गया। आकाश आनंद भी जानते हैं कि बीएसपी में रहकर जो राजनीतिक हासिल किया जा सकता है, वह न तो पार्टी बनाकर किया जा सकता है और न ही किसी दूसरी पार्टी में जाकर।

मायावती व आकश आनंद (सोर्स- सोशल मीडिया)

बीएसपी का राजनीतिक ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। दलित समुदाय का भी बीएसपी से मोहभंग हो रहा है। चंद्रशेखर आजाद दलितों के बीच तेजी से अपनी राजनीतिक जड़ें जमा रहे हैं, जिसकी वजह से दलित युवाओं का झुकाव भी उनकी ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में दलित युवाओं को चंद्रशेखर की ओर जाने से रोकने के लिए मायावती आकाश आनंद को राजनीति में लेकर आईं।

2017 में जब सहारनपुर में दलित-ठाकुर वर्चस्व की लड़ाई में चंद्रशेखर का नाम आया तो उसी समय आकाश को राजनीति की पिच पर उतारा गया। इतना ही नहीं, आकाश आनंद ने 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत भी नगीना से की, जहां से चंद्रशेखर आजाद लोकसभा सांसद हैं। आकाश के जरिए मायावती दलित युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करना चाहती हैं, जिस पर हर एक पार्टी की नज़र है।

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