India BRICS Nuclear Weapons: दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन से पहले 9 सितम्बर को अमेरिका की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत ने कम से कम 30 अतिरिक्त परमाणु वॉरहेड अपने नये निर्माणाधीन मिसाइलों के लिए जोड़े हैं, जिससे उसके ऑपरेशनल लांचर्स के लिए जो पहले से ही 160 वॉरहेड मौजूद हैं, उनकी संख्या बढ़कर 190 हो गई है। अमेरिका के थिंक टैंक द्वारा तैयार इस रिपोर्ट के प्रकाशन की टाइमिंग को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। ब्रिक्स के जरिये चीन, रूस व ईरान की तिकड़ी नई विश्व व्यवस्था स्थापित करने के प्रयास में है, जिसे अमेरिकी दादागीरी के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रिक्स की कोशिश है कि वह अपने सदस्यों के बीच में क्रॉस बॉर्डर पेमेंट्स का सिलसिला आरंभ करे, जिसमें डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसीज (सीबीडीसी) के बीच लिंक भी शामिल हो। अगर यह व्यवस्था हो जाती है तो विश्व व्यापार में डॉलर का महत्व कम हो जायेगा। अमेरिका यह नहीं चाहता। अभी तक दिल्ली का झुकाव वाशिंगटन की तरफ रहा है, इसलिए भारत ने अध्यक्ष होते हुए भी ब्रिक्स की तरफ से अमेरिका व इजराइल द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के खिलाफ निंदा प्रस्ताव जारी नहीं किया था।
हाल ही में बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित एससीओ सम्मेलन के हाशिये पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात करके अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत के पास नई विश्व व्यवस्था में शामिल होने का विकल्प खुला हुआ है।
यह संकेत इस लिहाज से अधिक प्रबल प्रतीत हुआ कि 7 वर्ष बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 67-सदस्यों के सरकारी दल, जिसमें शी जिनपिंग के अति विश्वसनीय काई ची (सीपीसी पोलितब्यूरो की तदर्थ समिति के सदस्य) व विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं, के साथ भारत आये हैं। चीन का व्यापार दल अलग से आ रहा है।
वाशिंगटन को नई विश्व व्यवस्था की ओर दिल्ली का झुकना पसंद नहीं है। अमेरिकी रिपोर्ट और उसके जारी करने के समय को इसी पृष्ठभूमि में समझने की आवश्यकता है। कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है। बहरहाल, 'भारत के परमाणु हथियार-2026' रिपोर्ट में कहा गया है, भारत अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण को जारी रखे हुए है। उसने हाल के वर्षों में अनेक नये हथियार सिस्टम्स फीड किये हैं। हमारा अनुमान है कि भारत ने 140 से 225 वॉरहेड के लिए पर्याप्त मात्रा में सैन्य प्लूटोनियम का उत्पादन कर लिया है और उसने 190 तक वॉरहेड असेम्बल कर लिए हैं।
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स न्यूक्लिर इनफार्मेशन प्रोजेक्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, 'हमारा अनुमान है कि भारत वर्तमान में 9 अलग-अलग परमाणु-सक्षम सिस्टम्स ऑपरेट करता है- दो एयरक्राफ्ट, छह भूमि-आधारित बैलिस्टिक मिसाइलें और एक समुद्र-आधारित बैलिस्टिक मिसाइल। कम से कम दो अतिरिक्त सिस्टम्स विकसित किये जा रहे हैं, जो पूर्ण होने की कगार पर हैं और उन्हें एक या कुछ वर्षों के भीतर सशस्त्र बलों के साथ तैनात किया जायेगा।' भारत अपने परमाणु हथियारों के भंडार की संख्या प्रकाशित नहीं करता है। ही बेहतर होता है।
रिपोर्ट में जो समीक्षा की गई है वह अनुमान के आधार पर है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, 'भारत जो हथियार ग्रेड का प्लूटोनियम बना रहा है, उसका स्रोत पुराना हो चुका 100-मेगावाट ध्रुव प्लूटोनियम प्रोडक्शन रिएक्टर है, जोकि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर कॉम्प्लेक्स में है। यह रिपोर्ट इस समय इसलिए जारी की गई है क्योंकि संसार के क्षेत्रीय समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं। भारत के पड़ोस में दो परमाणु शक्तियां हैं- चीन व पाकिस्तान, उनको मद्देनजर रखते हुए भारत को अपनी परमाणु क्षमताओं में विस्तार करने की आवश्यकता है, जो वह कर भी रहा है। लेकिन भारत अपने परमाणु भंडार का ढिंढोरा नहीं पीटता, क्योंकि इन बातों का गोपनीय रहना
भारत के पड़ोस में दो परमाणु शक्तियां हैं- चीन व पाकिस्तान, उनको मद्देनजर रखते हुए भारत को अपनी परमाणु क्षमताओं में विस्तार करने की आवश्यकता है, जो वह कर भी रहा है। लेकिन भारत अपने परमाणु भंडार का डिंडोरा नहीं पीटता, क्योंकि इन बातों का गोपनीय रहना ही बेहतर होता है।
लेख-विजय कपूर के द्वारा