शिव जी को जल क्यों चढ़ाते हैं (सौ.सोशल मीडिया)  
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सावन में शिवलिंग पर विधिवत जल चढ़ाने से ही मिलेगा लाभ, जानिए जलाभिषेक के नियम

सावन में शिवलिंग का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से महादेव खुश होते हैं। आइए जानते है सावन में शिव जी को जल क्यों चढ़ाते हैं और जलाभिषेक का सही तरीका क्या है।

सीमा कुमारी

Sawan 2025: कल से सावन महीने की शुरुआत होने जा रही हैं। शिव भक्तों के लिए सावन महीना बहुत ज्यादा महत्व रखता है। क्योंकि यह महीना भगवान शिव का प्रिय महीना कहलाता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवभक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाते और विधिवत पूजा-अर्चना करते है। मान्यता है कि, शिवलिंग का जलाभिषेक करने से महादेव खुश होते हैं और अपने भक्तों को सारे दुख दूर करते है और मनवांछित फल प्रदान करते है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है और इसके सही नियम क्या हैं? अगर नहीं तो ये आर्टिकल आपके लिए है, आइए शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम जानते हैं।

शिव जी को जल क्यों चढ़ाते हैं? जानिए

शिव पुराण में भगवान शिव को जल अर्पित करने के महत्व के बारे में बताया गया हैं। उसकी कथा के अनुसार, जब देव लोक यानि स्वर्ग श्रीहीन हो गया तो देवताओं को समुद्र मंथन का सुझाव मिला।

सभी देवता अकेले समुद्र मंथन नहीं कर सकते थे तो उन्होंने असुरों को भी इसमें शामिल किया। असुरों और देवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उससे सबसे पहले हाला​हल यानि विष निकला।

उस विष से पूरे संसार के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे। कोई भी इस संकट की घड़ी में आगे नहीं आया तो इसका जिम्मा महादेव ने उठाया। सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान शिव शंभू ने उस विष का पान किया। उस विष को कंठ में धारण करने से शिवजी नीलंकठ कहलाए।

विष काफी जहरीला था, भगवान शिव पर उसका कोई दुष्प्रभाव न हो, इसके लिए आदिशक्ति जगदम्बा ने शिव जी का जल से अभिषेक किया। यह देखकर अन्य सभी देवी और देवताओं ने शिव जी को जल चढ़ाया।

जल चढ़ाने से शिव जी को शीतलता मिली और विष का प्रभाव क्षीण हो गया और महादेव प्रसन्न हो गए। इस घटना के बाद से ही भगवान शिव को जल चढ़ाने की परंपरा शुरु हुई। जल अर्पित करने से भगवान शिव खुश होते हैं।

क्या है शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम

1. जिस​ दिन आपको शिवजी को जल चढ़ाना है, उस दिन सुबह में उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। साफ कपड़े पहनें। जल से आचमन करके खुद की शुद्धि कर लें।

2. इसके बाद अपने ही घर का एक साफ लोटा लें या कोई अन्य पात्र लें। उसमें गंगाजल और साफ पानी भर लें। अब उसमें अक्षत्, चंदन, फूल आदि डाल दें।

3. फिर​ शिव मंदिर में या पूजा घर में शिवलिंग के पास जाएं। पूर्व दिशा या ईशान कोण में मुख करके खड़े हों। उस बर्तन को दोनों हाथों से पकड़कर जल अर्पित करें।

4. शिवलिंग पर जल एक ही बार में तीव्र गति से नहीं चढ़ाना है जल की पतली धारा को धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित करना है सीधे खड़े होकर जल न चढ़ाएं, थोड़ा झुककर जल अर्पित करें ताकि शिवलिंग पर गिरने वाला जल आपके पैरों पर न पड़े।

5. शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें जब जल खत्म हो जाए तो महादेव को प्रणाम करें।

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