दिवाली पर जिमीकंद की सब्जी बनाने की पुरानी परंपरा है।
जिमीकंद को सूरन और ओल के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर भारत और बिहार के कई इलाकों में दिवाली पर इसे खाना शुभ माना जाता है।
जिमीकंद को सुख-समृद्धि, बरकत और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
इसकी बढ़ोतरी को जीवन में तरक्की और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।
Why Eat Jimikand On Diwali: दिवाली का त्योहार आते ही घरों में तरह-तरह के पकवान बनने लगते हैं। मिठाइयों से लेकर पारंपरिक व्यंजनों तक, हर चीज का अपना खास महत्व होता है। इन्हीं पारंपरिक पकवानों में जिमीकंद की सब्जी भी शामिल है।
खासकर उत्तर भारत और बिहार के कई इलाकों में दिवाली के दिन जिमीकंद की सब्जी बनाने और खाने की परंपरा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली जैसे खास त्योहार पर जिमीकंद ही क्यों बनाया जाता है? आइए जानते हैं इस परंपरा के पीछे की मान्यताएं और इसका महत्व।
जिमीकंद को सूरन और ओल के नाम से भी जाना जाता है। यह जमीन के अंदर उगने वाली एक सब्जी है। कई परिवारों में दिवाली के दिन जिमीकंद की सब्जी बनाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन इसे खाने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। यही वजह है कि पीढ़ियों से कई घरों में दिवाली के भोजन में जिमीकंद को शामिल किया जाता है।
जिमीकंद जमीन के अंदर उगता है और इसकी जड़ें मिट्टी में फैलती हैं। इसकी इसी विशेषता को लेकर एक पारंपरिक मान्यता प्रचलित है। माना जाता है कि जिमीकंद की तरह परिवार की खुशियां और समृद्धि भी लगातार बढ़ती रहें। इसके अलावा, इसे घर में बरकत और संपन्नता का प्रतीक मानने की परंपरा भी कुछ क्षेत्रों में देखने को मिलती है।
जिमीकंद की एक खास बात यह है कि यह मिट्टी के अंदर विकसित होता है और समय के साथ इसका आकार बढ़ता है। इसी वजह से इसे वृद्धि और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर इसे खाने का भाव जीवन में तरक्की, परिवार की खुशहाली और आर्थिक समृद्धि की कामना करना है।
दिवाली के मौके पर जिमीकंद की सब्जी अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती है। कुछ घरों में इसे आलू और मसालों के साथ पकाया जाता है, तो कहीं इसकी मसालेदार सूखी सब्जी बनाई जाती है। इसे बनाने के लिए जिमीकंद को छीलकर छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और अच्छी तरह पकाया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें हल्दी, धनिया, जीरा और अन्य मसालों का इस्तेमाल किया जाता है।
दिवाली पर जिमीकंद की सब्जी बनाना केवल भोजन की परंपरा नहीं, बल्कि परिवार और संस्कृति से जुड़ाव का भी प्रतीक है। अलग-अलग क्षेत्रों में त्योहार मनाने के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन हर परंपरा के पीछे खुशहाली और अच्छे भविष्य की कामना जुड़ी होती है। ऐसे में दिवाली के पकवानों में जिमीकंद को शामिल करना पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने का एक सुंदर तरीका है।