नवरात्रि में पूड़ी, हलवा और काले चने का भोग महत्व(सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

चैत्र नवरात्रि के भोग में क्यों चढ़ाते हैं हलवा, पूड़ी और चने, धार्मिक नहीं, इसके पीछे आध्यात्मिक विज्ञान जानिए

महाअष्टमी और महानवमी तिथियां बहुत ही शुभ एवं खास मानी जाती है। अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन होता है, जिसमें 9 कन्याओं और 1 बालक को पूड़ी, हलवा और काले चने का भोग चढ़ाया जाता है। यह परंपरा देवी भागवत पुराण में वर्णित है।

सीमा कुमारी

Navratri 2025: नवरात्रि के पावन पर्व की महाअष्टमी और महानवमी तिथियां बहुत ही शुभ एवं खास मानी जाती है। नवरात्री के अष्‍टमी में, मां दुर्गा के आठवे स्वरूप महागौरी को और नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन दोनों तिथियों पर मां के उपासक छोटी बच्चियों की सेवा कर उन्‍हें प्रसाद खिलाते हैं, जिसे कंजक कहा जाता है।

इस विशेष दिन पर 9 कन्या और 1 लंगुर यानी बालक को भोग चढ़ाते हैं और उनको पूजते है। प्रसाद के रूप में पूड़ी, सूजी का हलवा और सूखे काले चने परोसे जाते हैं, जो सालों से चली आ रही परंपरा के रूप में है।

यह परंपरा देवी भागवत पुराण में भी वर्णित है, जिसमें कन्याओं को देवी दुर्गा के स्वरूप माना गया है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, इन कन्याओं को देवी दुर्गा के 9 रूपों का प्रतीक माना जाता है। कन्या पूजन के माध्यम से भक्त देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते है।

कभी आपने सोचा है क‍ि नवरात्रियों में ये ही प्रसाद क्‍यों चढ़ाया जाता हैं? इसके पीछे भी धार्मिक आस्‍था के साथ साइंस जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं इस बारे में-

जानिए कैसे की जाती है कंजक पूजा

परंपरा के अनुसार, कंजक पूजा नवजात शिशु से लेकर 10 साल की उम्र की छोटी लड़कियों के पैर धोने से शुरू होती है। इसके बाद, उनके माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाया जाता है और उनके हाथों में एक कलावा बांधा जाता है। उसके बाद, उन्हें नारियल से बना प्रसाद दिया जाता है, उसके बाद पूरी, हलवा और सुखा काला चना दिया जाता है।

पूजा के अंत में, उन्हें धन, आभूषण, कपड़े, खिलौने आदि के रूप में उपहार भी दिए जाते हैं। अंत में, भक्त उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद मांगते हैं, और उनके जाने के बाद, भक्त बचे हुए भोजन से उपवास तोड़ते हैं।

कंजक प्रसाद हलवा, पूड़ी और चने खाने के फायदे जानिए

कंजक प्रसाद में तीन चीज़ें खासतौर से शामिल होती हैं काला चना, हलवा और पूड़ी। पूड़ी, हलवा और चने का यह कॉम्बिनेशन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता हैं। सात्त्विक आहार के बाद, पाचन दुरुस्त रखने से लेकर हड्डियों को मजबूत बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने जैसे और भी कई गुण है घी में।

काला चना और सूजी फाइबर से भरपूर होते हैं, जो मोटापे के साथ ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी बेहद फायदेमंद होता है। काले चने में प्रोटीन और आयरन की भी अच्छी खासी मात्रा होती है। इसे खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल में रहता है। वहीं सूजी इम्युनिटी, एनर्जी बढ़ाने से लेकर एनीमिया और दिल की बीमारियों के खतरे को करती है कम।

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