Pithori Amavasya Par Kya Na Karein: 10 सितंबर यानी कल भाद्रपद माह की अमावस्या यानी पिठोरी अमावस्या मनाई जाएगी। सनातन धर्म में पिठोरी अमावस्या का बड़ा महत्व बताया गया है। पिठोरी अमावस्या के दिन पवित्र नदियो में स्नान, दान, पितृकर्म और कुश इकट्ठा करने के अलावा, यह अमावस्या माताओं के लिए खास महत्व रखता है।
इस दिन माताएं अपनी संतान की खुशहाली के लिए व्रत भी रखती हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, पिठोरी अमावस्या के दिन भूलकर भी कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं। पिठोरी अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?
ज्योतिषयों के अनुसार, पिठौरी अमावस्या के दिन फ्रिज में रखा बासी या पुराना गूंथा हुआ आटा भूलकर भी इस्तेमाल न करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बासी आटा पिंड के समान माना जाता है, जिससे राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है। इसीलिए, इस विशेष दिन पर ताजे आटे का ही प्रयोग करना शुभ होता है।
कोई भी अमावस्या तिथि उस दिन भूल से भी तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज आदि चीजों का सेवन करना वर्जित माना जाता है।
धर्म शास्त्रों में एकादशी, द्वादशी, पूर्णिमा, रविवार, सूर्य संक्रांति के अलावा अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त मना होता है। पूजा के लिए तुलसी पत्र एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। यदि आप वर्षभर के पूजा-पाठ के लिए 'कुश' (पवित्र घास) एकत्र कर रहे हैं, तो बिना मंत्र बोले या लोहे के औजार से कुश न उखाड़ें।
इस दिन घर में बना पहला भोजन केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं होता। बल्कि पंचबलि की परंपरा के अनुसार, गाय, कौवे, कुत्ते, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन निकाला जरूरी बताया है। इसके बिना श्राद्ध अधूरा माना जाता है। इसलिए इस दिन इन बातों का ख़ास ध्यान देना चाहिए।
पिठौरी अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाएं और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों से अपनी भूल-चूक की क्षमा मांगें। मान्यता है कि, ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार परअपनी कृपा बनाए रखते है।