भगवान विष्णु और लक्ष्मी (सौ.AI) 
धर्म

Ekadashi Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरी है वरुथिनी एकादशी की पूजा, यहां जानिए व्रत के सही नियम

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वरुथिनी एकादशी का व्रत बिना कथा के अधूरा माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा, व्रत और कथा श्रवण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

सीमा कुमारी

Varuthini Ekadashi Vrat Kahani : आज 13 अप्रैल को वैशाख माह का पहला एकादशी यानी वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा हैं। हिंदू धर्म ग्रथों में इस एकादशी का व्रत बड़ा महत्व है। ऐसी मान्यता है कि, इस एकादशी का व्रत को करने से व्यक्ति को 10 हजार वर्षों की तपस्या करने के बराबर फल मिलता है।

वरुथिनी एकादशी का व्रत महत्व

हिन्दू धर्म शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी का व्रत बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने और व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। भविष्यपुराण के अनुसार, इस व्रत को रखने से पद- प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सभी पापों का नाश मिल सकता है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखने से संसारिक दुःखों से मुक्त होकर सत्य सुख को प्राप्त होता है। यदि आप वरुथिनी एकादशी का व्रत कर रहे हैं, तो पूजा के दौरान मंत्रों और चालीसा का पाठ करने के बाद व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पूरा और शुभ फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा।

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा Varuthini Ekadashi Vrat Katha

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक एक राजा राज्य करता था। बताया जाता है कि राजा दानशील और तपस्वी स्वभाव का था। एक बार वह जंगल में तपस्या कर रहा था कि, तभी वहां एक भालू आ गया और राजा के पैर पर हमला कर दिया। लेकिन इसके बावजूद राजा अपनी तपस्या में लीन थे। इस तरह से भालू राजा का पैर चबाते-चबाते उसे घसीटता हुआ जंगल ले गया। इसके बाद राजा को घबराहट तो हुई और वह भगवान विष्णु से मदद मांगते हुए प्रार्थना करने लगे। भक्त की सच्ची पुकार सुन भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से भालू को मार कर भक्त मान्धाता के प्राण की रक्षा की। लेकिन भालू राजा के पैर को पूरी तरह से खा चुका था।

राजा को दुखी देखकर श्रीहरि ने उससे कहा, तुम मथुरा जाओ और वैशाख माह की वरुथिनी एकादशी का व्रत रखो। व्रत रखकर तुम मेरे वराह अवतार की पूजा करना। इसके बाद तुम्हारे जिस अंग को भालू ने खाया है वह वापस आ जाएंगे । साथ ही भगवान विष्णु राजा को यह भी बताया है कि, भालू ने तुम्हारे जिस अंग को काटा है वह तुम्हारे पिछले जन्म का पाप था।

इसके बाद राजा मान्धाता ने मथुरा जाकर वैशाख माह की वरुथिनी एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से फिर से उसके अंग वापस आ गए इतना ही नहीं मृत्यु के बाद राजा को स्वर्ग लोक की प्राप्ति भी हुई। मान्यता है कि इसके बाद से ही वरुथिनी एकादशी व्रत की परंपरा की शुरुआत हुई।

बंगाल के मालदा में BJP कार्यकर्ता की हत्या, पहले धारदार से हथियार किया हमला, फिर मारी गोली, इलाके में तनाव

सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर जारी की पहली वीडियो, अपनी पहली किताब से दुनिया को कराया रूबरू

जमानत मिलते ही सौरभ दास और आशुतोष रांका को क्राइम ब्रांच का समन, आज दोपहर 12 बजे पूछताछ के लिए बुलाया

राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का सफर, गुजरात की राजनीति और धारा 370 हटाने तक के उनके ऐतिहासिक पड़ाव

राज ठाकरे ने शेयर की PM मोदी-अडानी की विवादित डॉक्यूमेंट्री, बोले- डिलीट होने से पहले देख लें VIDEO