Devshayani Ekadashi Fasting Rules:आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली देवशयनी एकादशी इस बार 25 जुलाई, शनिवार को पड़ रही है। इसे अलग-अलग राज्यों में आषाढ़ी एकादशी, हरि शयनी एकादशी और पद्म एकादशी जैसे कई अन्य नामों से जाना जाता है।
इस एकादशी का उल्लेख विष्णु पुराण, पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण में प्रमुख रूप से मिलता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार मासों के लिए क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ ऐसे काम हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी के दिन किन कामों से बचना चाहिए?
यदि आप एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो भूलकर भी चावल, गेहूं, दाल और अन्य अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए। एकादशी के मौके पर फलों का सेवन करना ही शुभ माना गया है।
देवशयनी एकादशी के दिन मांस, मछली, अंडा, शराब और अन्य तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन और भगवान विष्णु की भक्ति को सर्वोत्तम माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, एकादशी के मौके पर भूलकर भी तुलसी के पत्तों को तोड़ना नहीं चाहिए। अगर पूजा में तुलसी के पत्तों की जरूरत है, तो उसे एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लेना चाहिए।
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देवशयनी एकादसी के दिन से ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में चार महीने तक किसी भी तरह के शुभ कार्यों को करने से अशुभ परिणाम की प्राप्ति हो सकती है। इस लिए देवशयनी एकादशी से लेकर चातुर्मास के खत्म होने तक गृह प्रवेश, विवाह और बड़े मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए।
इस दिन गरीब, बुजुर्ग, साधु-संत, माता-पिता और जरूरतमंद लोगों का अपमान करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न नहीं होते ।
एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि को करने का विधान होता है। इस दिन नियमानुसार पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।