Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी की रात 12 बजते ही हर घर से घंटे की आवाज के साथ कान्हा का नाम गूंजने लगता है। कोई लड्डू गोपाल को झूला झुलाता है, कोई माखन-मिश्री का भोग लगाता है और कोई कृष्ण मंत्र का जाप करता है, लेकिन कृष्ण से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जिनकी कहानी आपको जरूर जाननी चाहिए।
अमूमन ये सवाल हमारे मन में आता है, जैसे- कृष्ण नाम उन्हें किसने दिया था? उनके सिर पर मोरपंख औऱ हाथों में बांसुरी क्यों है और पांचजन्य शंख व सुदर्शन चक्र उनके साथ कब जुड़े? इस जन्माष्टमी इन सारे सवालों के जवाब जरूर जानना चाहिए।
पौराणिक कथा के अनुसार, कृष्ण का नामकरण ऋषि गर्गाचार्य ने किया था। वे यदुवंश के कुलपुरोहित माने जाते थे। कंस की नजर देवकी के आठवें पुत्र की तलाश में थी, इसलिए नंद बाबा के घर हुए नामकरण संस्कार को सार से छुपाया गया। इसी दौरान कुलपुरोहित गर्गाचार्य ने गोकुल में गुप्त रूप से नामकरण संस्कार किया। उन्होंने बताया कि यह बालक अलग-अलग युगों में अलग-अलग वर्णों में प्रकट हुआ है और इस बार इसका वर्ण श्याम है और इसी वजह से उनका नाम कृष्ण रखा गया।
कृष्ण और मोरपंख जैसे एक-दूसरे के पूरक हों, उनकी कल्पना मोरपंख के बिना अधूरी लगती है। धार्मिक ग्रंथों में उनके स्वरूप का वर्णन करते हुए सिर पर मोरपंख और हाथ में बांसुरी का उल्लेख मिलता है। श्रीमद्भागवत में भी कृष्ण के बाल स्वरूप और वन-विहार की कथाओं में मोरपंख और बांसुरी का वर्णन मिलता है। इसी वजह से जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के श्रृंगार में मोरपंख लगाने की परंपरा है।
कृष्ण की बांसुरी को सिर्फ एक वाद्य यंत्र के रूप में नहीं देखा जाता। ब्रह्मसंहिता में भी कृष्ण को बांसुरी बजाने वाले और मोरपंख धारण करने वाले स्वरूप में वर्णित किया गया है। वृंदावन की कथाओं में कृष्ण की बांसुरी की धुन का विशेष महत्व बताया गया है। यही वजह है कि आज भी उनकी मूर्ति और चित्र में बांसुरी उनके प्रतीकों में शामिल है।
कृष्ण से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा उनके पांचजन्य शंख के बारे में बताती है। गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा पूरी करने के बाद कृष्ण और बलराम ने गुरु दक्षिणा देने की इच्छा जताई। गुरु ने अपने खोए हुए पुत्र को वापस लाने की इच्छा बताई। कथा के अनुसार, कृष्ण समुद्र तक पहुंचे। वहां पंचजन नामक दैत्य से उनका सामना हुआ। उसे पराजित करने के बाद कृष्ण को एक दिव्य शंख प्राप्त हुआ, जिसे पांचजन्य कहा गया। बाद में यही शंख कृष्ण के अन्य प्रतीकों के साथ शामिल हुआ। महाभारत में भी कृष्ण के पांचजन्य शंख का उल्लेख मिलता है।
कृष्ण के साथ जुड़ा दूसरा शक्तिशाली प्रतीक है सुदर्शन चक्र। यह उनके उग्र स्वरूप को दर्शाता है। यह मूल रूप से भगवान विष्णु के प्रमुख आयुधों यानी शस्त्रों में गिना जाता है और कृष्ण को विष्णु का माना जाता है।
महाभारत के खांडव प्रसंग में अग्निदेव द्वारा कृष्ण को एक दिव्य चक्र मिलने का उल्लेख मिलता है, जबकि सुदर्शन की उत्पत्ति को लेकर कई अन्य पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं।