8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी दीपावली 2026।
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा होती है।
मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है।
भगवान गणेश बुद्धि, शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते हैं।
दिवाली की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है।
Diwali Puja Samagri : 8 नवंबर, रविवार को दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। यह त्योहार रोशनी, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी धन, वैभव और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि, शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है।
इसलिए दिवाली की पूजा में दोनों को एक साथ पूजने की परंपरा है। हालांकि, पूजा करते समय कई छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। अगर आप भी दिवाली 2026 पर घर में लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।
दिवाली की पूजा के लिए सबसे पहले घर के साफ और शांत स्थान का चुनाव करें। पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें। सामान्य परंपरा के अनुसार भगवान गणेश को मां लक्ष्मी के बाईं ओर विराजमान किया जाता है। मूर्तियों को इस तरह रखें कि पूजा करते समय उनका मुख आपकी ओर हो।
लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए रोली, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीपक, घी, मिठाई, फल, कलश और पूजा की अन्य जरूरी सामग्री पहले से एकत्र कर लें। मां लक्ष्मी को कमल का फूल विशेष प्रिय माना जाता है। वहीं भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करने की परंपरा है। पूजा सामग्री व्यवस्थित रखने से पूजन के दौरान आसानी रहती है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, दिवाली की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। उन्हें प्रथम पूज्य माना गया है। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। गणेश जी को बुद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक मानकर पूजा जाता है, जबकि मां लक्ष्मी से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते समय पूजा स्थल को साफ रखें। दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करें। पूजा में फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीप जलाने की भी परंपरा है। पूजा के समय जल्दबाजी करने के बजाय परिवार के साथ शांत मन से आराधना करें।
पूजा पूरी होने के बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद भगवान को अर्पित किया गया प्रसाद परिवार के लोगों और अन्य सदस्यों में बांटें। इस तरह दीपावली का पूजन श्रद्धा, उल्लास और पारिवारिक एकता के साथ संपन्न किया जा सकता है।