भड़ली नवमी (सौ.सोशल मीडिया)  
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Bhadli Navami : आज है भड़ली नवमी, आखिर क्यों इस दिन बिना मुहूर्त भी किए जा सकते हैं शुभ कार्य

Bhadli Navami Religious Significance: भड़ली नवमी को हिंदू धर्म में साल के सबसे शुभ और अबूझ मुहूर्त वाले दिनों में से एक माना जाता है। जानिए भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व और इसके पीछे की मान्यता।

सीमा कुमारी

Bhadli Navami Marriage Muhurat : आज 22 जुलाई को भड़ली नवमी मनाई जा रही हैं। भड़ली नवमी हिंदू धर्म में वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक मानी जाती है, जिसे ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहते हैं। भड़ली नवमी को भड़रिया नौमी, भड़ल्या नवमी, भढली नवमी, भड़ली नवमी, भादरिया नवमी, भदरिया नवमी, कन्दर्प नवमी एवं बदरिया नवमी आदि नाम से भी जाना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार, इसी दिन आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर नवरात्रि खत्म हो जाती है।

ज्योतिष एवं लोक मान्यता के अनुसार, इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यापार जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। माना जाता है कि इस तिथि पर किए गए शुभ कार्यों में सफलता, समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि भड़ली नवमी को साल के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है।

साल 2026 भड़ली नवमी का शुभ समय

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत आज 22 जुलाई को सुबह में 5 बजकर 16 मिनट से है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 3 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए भड़ली नवमी का व्रत आज 22 जुलाई को रखा जाएगा।

शुभ कार्यों के लिए क्यों चुनी जाती है यह शुभ तिथि?

सनातन धर्म में भड़ली नवमी वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक मानी जाती है। क्योंकि, इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त को देखने की जरूरत नही होती है।इसलिए इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय का शुभारंभ, संपत्ति खरीदना, धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य करना शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन शुरू किए गए कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सफलता की संभावना बढ़ती है।

हिन्दू धर्म में भड़ली नवमी का है खास महत्व

धर्म शास्त्रों के अनुसार जिस लोगों के विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकलता है वो भड़ली नवमी के दिन अपना विवाह कर सकता है। भड़ली नवमी के बाद चातुमास लग जाता है जिसके बाद अगले 4-5 महीनें तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है।

ऐसा कहा जा सकता है कोई भी मांगलिक कार्य करने के लिए यह तिथि शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागृत होते हैं। तभी मांगलिक कार्य किए जाते है।

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