Rajasthan Crime Update: राजस्थान के अजमेर जिले में स्कॉर्पियो कार में लगी आग की घटना महज एक हादसा नहीं बल्कि एक सोचा समझा हत्याकांड था। पुलिस की जांच में पूरा खुलासा हो गया है। पूर्व सरपंच राम सिंह चौधरी की पहली पत्नी ने इंतकाम लेने के लिए अपने पति, सौतन, सास और भतीजी की हत्या कर साक्ष्य मिटाने के लिए गाड़ी में आग लगा दी थी। पुलिस ने मामले का पर्दाफाश कर दिया है।
अजमेर के अराई इलाके के श्री रामपुरा गांव में गुरुवार सुबह एक जली हुई स्कॉर्पियो मिलने से सनसनी फैल गई थी। शुरुआती कहानी यह थी कि बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब होने पर परिवार उन्हें अस्पताल ले जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में यह पूरी तरह झूठी साबित हुई। हकीकत में, राम सिंह चौधरी की पहली पत्नी सुनीता ने पारिवारिक विवाद और मारपीट से तंग आकर इस वारदात को अंजाम दिया। राम सिंह अपनी दोनों पत्नियों के साथ एक ही घर में रहता था और अक्सर शराब पीकर पहली पत्नी के साथ मारपीट करता था।
पुलिस के अनुसार, चारों की हत्या पहले घर के भीतर ही की गई थी। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए शवों को स्कॉर्पियो में रखकर घर से 500 मीटर दूर एक सुनियोजित स्थान पर ले जाया गया और वहां गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया ताकि मामला एक दुर्घटना लगे। गाड़ी के भीतर तीन शव मिले, जबकि चौथी लाश पास के ही एक खेत में पड़ी मिली।
हत्या की पोल तब खुली जब पुलिस राम सिंह के घर पहुंची। वहां एक कमरा हाल ही में धोया गया था, लेकिन इसके बावजूद फर्श पर खून के निशान और पास में खून से सनी दो ईंटें बरामद हुईं। इसके अलावा, पुलिस को मौके से डीजल के निशान भी मिले। सबसे बड़ा संदेह तब हुआ जब पुलिस ने पाया कि जिस दिशा में जली हुई स्कॉर्पियो खड़ी थी, वह अस्पताल जाने वाले रास्ते के बिल्कुल विपरीत थी।
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इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राम सिंह की पहली पत्नी सुनीता, उसकी बेटी सरिता और 17 वर्षीय बेटे को हिरासत में ले लिया है। शुरुआती जांच में मृतकों के शवों पर गला काटने जैसे निशान मिलने की भी बात सामने आई है। मृतकों की पहचान पूर्व सरपंच राम सिंह चौधरी, उनकी मां पूसी देवी, उनकी दूसरी पत्नी जिला परिषद सदस्य सूर्यज्ञान देवी और भांजी महिमा चौधरी के रूप में हुई है।