Highlights:
प्रो. एसपी सिंह बघेल ने की नव भारत से विशेष बातचीत
राहुल गांधी, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी पर किए तीखे राजनीतिक हमले
विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का लगाया आरोप
Navbharat S. P. Singh Baghel Interview: केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष बिना साझा सिद्धांत, स्पष्ट नेतृत्व और ठोस विजन के एकजुट होकर देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने विपक्षी एकता को राजनीतिक अवसरवाद बताते हुए कहा कि जब किसी देश का राजा लोकप्रिय होता है, तब उसके विरोधी आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हो जाते हैं। चाणक्य के विचारों का उल्लेख करते हुए बघेल ने विपक्षी दलों की एकजुटता को इसी राजनीतिक परिस्थिति से जोड़कर देखा।
नव भारत से विशेष बातचीत में प्रो. बघेल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया और कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की कमान संभालने के बाद से राहुल गांधी लगातार चुनावी हार का सामना कर रहे हैं। तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “मैं राहुल गांधी को बधाई दूंगा कि उन्होंने अभी-अभी हार का शतक जड़ा है।” उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और पूर्वोत्तर के आगामी चुनावों के बाद राहुल गांधी की हार की कथित ‘108 हार की माला’ भी पूरी हो जाएगी।
बघेल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत में संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के साथ विदेशों में भी ऐसे मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद इनकी निष्पक्षता और प्रतिष्ठा पर सवाल उठाते समय जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।
कांग्रेस की ओर से भाजपा को 400 सीटें मिलने पर संविधान बदलने की आशंका जताए जाने के मुद्दे पर भी प्रो. बघेल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संविधान और लोकतंत्र पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। बघेल ने आपातकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में बने रहने के लिए संविधान में कई संशोधन किए थे।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संस्थागत विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए बघेल ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय अखिलेश यादव ने दावा किया था कि भाजपा दो सीटों पर सिमट जाएगी, लेकिन सपा अपने परिवार की प्रमुख सीटों को भी नहीं बचा सकी।
बघेल ने कन्नौज, फिरोजाबाद और बदायूं का उल्लेख करते हुए कहा कि डिंपल यादव, अक्षय यादव और धर्मेंद्र यादव को उन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो दल अपने परिवार की सीटें नहीं बचा सका, वह भाजपा जैसे राजनीतिक वटवृक्ष को हराने का दावा कर रहा था।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संभल से चुनाव लड़ने की चुनौती दिए जाने के मुद्दे पर भी बघेल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ओवैसी को पहले स्वयं अपनी राजनीतिक ताकत साबित करनी चाहिए और हैदराबाद से बाहर किसी अन्य लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।
बघेल ने ओवैसी परिवार की चुनावी राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि दूसरों को चुनौती देने से पहले नेताओं को अपनी राजनीतिक सीमाओं से बाहर निकलकर भी जनसमर्थन साबित करना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक डॉ. राममनोहर लोहिया का उदाहरण देते हुए प्रो. बघेल ने सपा परिवार की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोहिया ऐसे नेता थे, जिन्होंने जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ फूलपुर से चुनाव लड़ने का फैसला किया था। बघेल के मुताबिक, लोहिया चाहते तो दूसरी सीट से चुनाव लड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने नेहरू के सामने उतरने का साहस दिखाया।
इसके विपरीत बघेल ने आरोप लगाया कि सैफई परिवार उत्तर प्रदेश की चुनिंदा और सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों पर ही चुनाव लड़ता रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देने वाले सपा नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि दूसरों को चुनौती देने से पहले उन्हें अपनी चुनावी रणनीति और राजनीतिक साहस पर भी विचार करना चाहिए।
बघेल ने इटावा सीट के चुनावी इतिहास और समाजवादी पार्टी के पारिवारिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत राजनीतिक विरासत होने के बावजूद सपा को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने वर्ष 2019 में सपा और बसपा के गठबंधन का हवाला देते हुए कहा कि विपक्षी दलों की एकजुटता नई नहीं है, लेकिन केवल गठबंधन कर लेने से चुनावी सफलता सुनिश्चित नहीं होती। उन्होंने विपक्षी गठबंधनों को सिद्धांत, नेतृत्व और स्पष्ट विकास दृष्टि के अभाव से जोड़ते हुए भाजपा की राजनीतिक स्थिति को मजबूत बताया।
प्रो. एसपी सिंह बघेल के बयानों से साफ है कि आगामी चुनावों को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं। उनके निशाने पर जहां राहुल गांधी और कांग्रेस की रणनीति रही, वहीं अखिलेश यादव की चुनावी राजनीति और ओवैसी की चुनौती को भी उन्होंने अपने राजनीतिक हमलों का हिस्सा बनाया।