यश चोपड़ा (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
अमिताभ बच्चन के करियर को नई दिशा देने में यश चोपड़ा का योगदान माना जाता है। 70 के दशक में आई 'दीवार' और 'त्रिशूल' जैसी मास्टरपीस फिल्मों के जरिए उन्होंने पर्दे पर एक नया इतिहास रचा। 90 के दशक में जब डर फिल्म सिनेमाघरों में आई, तो उसने दर्शकों को एक नए दौर का अहसास कराया। इस फिल्म में शाहरुख खान के नेगेटिव रोल को जिस तरह से पेश किया गया, उसने उनकी पॉपुलेरिटी में रातों-रात जबरदस्त इजाफा कर दिया। यश चोपड़ा ने अपने दौर के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ भी काम किया और उनकी लव स्टोरी को पर्दे पर बेहद खूबसूरती से उतारा। उनके डायरेक्शन में बनी रोमांटिक फिल्मों ने राजेश खन्ना के जादुई स्टारडम को और ज्यादा मजबूती दी।70 और 80 के दशक में जब एक्शन फिल्मों का दौर चरम पर था, तब यश चोपड़ा ने शशि कपूर की सौम्य छवि को बड़ी ही खूबसूरती से पर्दे पर इस्तेमाल किया। 'दीवार', 'कभी-कभी' और 'त्रिशूल' जैसी सुपरहिट फिल्मों में शशि कपूर की एक्टिंग ने एक अलग छाप छोड़ी। 80 के दशक में फिल्म 'चांदनी' के जरिए बड़े पर्दे पर फिर से रोमांस, संगीत और खूबसूरत वादियों का दौर वापस लाया। इस फिल्म में श्रीदेवी का 'चांदनी' का रोल सिर्फ एक भूमिका बनकर नहीं रहा, बल्कि वह एक सांस्कृतिक पहचान बन गया।