रविंद्र जैन सोर्स- सोशल मीडिया
रविंद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। वे जन्म से ही नेत्रहीन थे, लेकिन इस चुनौती ने उनके संगीत के प्रति प्रेम को कभी कमजोर नहीं होने दिया।बचपन से ही रविंद्र जैन का रुझान संगीत की ओर साफ नजर आने लगा था, और धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक कुशल संगीतकार, गीतकार और गायक के रूप में निखारना शुरू कर दिया।1972 के आसपास रविंद्र जैन अलीगढ़ से मुंबई आए और फिल्मी दुनिया में संगीत देना शुरू किया। उनका पहला गाना खुद मोहम्मद रफी ने गाया था, हालांकि वह गाना कभी रिलीज नहीं हो पाया।1974 में आई फिल्म "चोर मचाए शोर" ने रविंद्र जैन को इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान दिलाई। इसी फिल्म के एक गाने की धुन बाद में "दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे" टाइटल सॉन्ग के लिए भी इस्तेमाल हुई।रविंद्र जैन ने ही दक्षिण भारतीय गायक के.जे. यसुदास को बॉलीवुड में पहचान दिलाई। 1976 की फिल्म "चितचोर" से शुरू हुई उनकी जोड़ी ने कई यादगार गीत दिए, और जैन उन्हें "भारत की आवाज" कहकर बुलाते थे।"चितचोर", "गीत गाता चल", "नदिया के पार" और "तपस्या" जैसी राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों में रविंद्र जैन के मधुर संगीत ने एक अलग ही पहचान बनाई, जो सीधी-सादी पर दिल को छूने वाली धुनों के लिए जानी गई।1985 में आई राज कपूर की फिल्म "राम तेरी गंगा मैली" रविंद्र जैन के करियर का सबसे बड़ा मुकाम साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।फिल्मों के अलावा रविंद्र जैन ने रामानंद सागर की "रामायण" और "लव कुश" जैसे धारावाहिकों के लिए भी संगीत दिया, जो आज भी भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार संगीत में गिना जाता है।अपने चार दशकों से लंबे संगीत सफर और असाधारण योगदान के लिए 2015 में रविंद्र जैन को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया।लंबी बीमारी से जूझने के बाद 9 अक्टूबर 2015 को मुंबई में मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण रविंद्र जैन का निधन हो गया। लेकिन उनकी बनाई धुनें आज भी करोड़ों दिलों में उतनी ही ताजगी के साथ गूंजती हैं।