रेबीज से बचाव source: Pinterest
अगर घर में कुत्ता, बिल्ली या कोई अन्य पालतू जानवर है, तो उसे समय-समय पर रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह रेबीज से बचाव का सबसे पहला और सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।सड़क पर घूमने वाले अनजान कुत्तों, बिल्लियों या बंदरों को न छेड़ें, उन्हें खाना खिलाते वक्त सावधानी बरतें और बच्चों को भी उनसे दूर रहने की सीख दें।अगर कोई जानवर काट ले या खरोंच दे, तो घबराने के बजाय तुरंत घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। यह कदम संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।घाव को धोने के तुरंत बाद उस पर पोविडोन आयोडीन या 70% अल्कोहल जैसा एंटीसेप्टिक लगाएं, ताकि घाव में मौजूद संभावित वायरस का असर और कम हो सके।जब तक बहुत ज्यादा खून न बह रहा हो, तब तक घाव को कसकर बांधने या तुरंत टांके लगवाने से बचें। खुला घाव तेजी से ठीक होने में मदद करता है।घाव चाहे कितना भी मामूली क्यों न लगे, फर्स्ट एड के तुरंत बाद नजदीकी अस्पताल या हेल्थ सेंटर जाकर डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।अगर डॉक्टर रेबीज वैक्सीन लेने की सलाह दें, तो पूरा कोर्स बीच में छोड़े बिना, तय समय पर सभी डोज जरूर लें। अधूरा कोर्स सुरक्षा को कमजोर कर सकता है।अगर घाव गहरा हो या उससे लगातार खून बह रहा हो, तो डॉक्टर सिर्फ वैक्सीन ही नहीं बल्कि रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन भी लगाने की सलाह दे सकते हैं, जो अतिरिक्त सुरक्षा देता है।आसपास के लोगों, बच्चों और परिवार को रेबीज के खतरों और सही फर्स्ट एड के बारे में जागरूक करें, क्योंकि सही जानकारी और समय पर इलाज से रेबीज को पूरी तरह रोका जा सकता है।