बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक उफान आया। देखते ही देखते पानी और मलबे ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। फ्लैश फ्लड में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और राहत-बचाव अभियान जारी है। शुरुआती आकलन में बारिश या बादल फटने के बजाय भूकंप और एवलांच को संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, बाढ़ की सटीक वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। USGS के मुताबिक सुबह 8:37 बजे तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके करीब 23 मिनट बाद भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। विशेषज्ञों के मुताबिक भूकंप के कारण बर्फ और चट्टानों का एवलांच हुआ हो सकता है। इससे नदी का रास्ता बाधित होकर जमा पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर बहा होगा। भोटेकोशी नदी का उद्गम तिब्बत में होता है, जहां इसे ल्हेंडे नदी कहा जाता है। नेपाल में प्रवेश के बाद यह भोटेकोशी के नाम से बहती हुई आगे त्रिशूली नदी में मिलती है। बाढ़ का सबसे पहला बड़ा असर रसुवा जिले के तिमुरे और स्याप्रुबेसी इलाकों में देखने को मिला। चीन-नेपाल सीमा के पास कई इलाके पानी और मलबे की चपेट में आए। भोटेकोशी का पानी आगे त्रिशूली नदी में पहुंचा, जिससे नुवाकोट में भी जलस्तर बढ़ गया। कई इमारतें और वाहन मलबे में दब गए, जबकि पुलों को भी नुकसान पहुंचा। रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग के अलावा गोरखा, चितवन और तनाहुन में भी खतरा बढ़ गया है। लोगों को भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी के किनारे जाने से बचने की सलाह दी गई है। भोटेकोशी का जल तंत्र आगे गंडक नदी से जुड़ता है, जिसके चलते नेपाल से सटे बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। अगले 24 से 72 घंटे नदी क्षेत्रों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।