कुलभूषण खरबंदा (सौ. सोशल मीडिया)
रमेश सिप्पी की फिल्म शान में शाकाल के किरदार ने कुलभूषण खरबंदा को खास पहचान दिलाई। उनका गंजा लुक, हाई-टेक ठिकाना और मगरमच्छों से भरा खतरनाक माहौल इस विलेन को दूसरे खलनायकों से अलग बनाता था। शांत अंदाज में खौफ पैदा करने वाली उनकी अदाकारी ने शाकाल को हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में शामिल कर दिया।
फिल्म जो जीता वही सिकंदर में कुलभूषण खरबंदा ने आमिर खान के किरदार संजय यानी संजू के पिता रतनलाल की भूमिका निभाई। एक साधारण साइकिल मैकेनिक और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित पिता के रूप में उनका अभिनय दर्शकों को भावुक करता है। उनके किरदार में सख्ती के साथ परिवार के प्रति प्यार भी नजर आता है।
जेपी दत्ता की देशभक्ति फिल्म बॉर्डर में कुलभूषण खरबंदा ने कर्नल पुरी की भूमिका निभाई। युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में उनका किरदार सीमित समय के लिए दिखाई देता है, लेकिन उनकी गंभीर आवाज और प्रभावशाली स्क्रीन मौजूदगी कहानी को मजबूती देती है।
आशुतोष गोवारिकर की ऑस्कर नामांकित फिल्म लगान में कुलभूषण खरबंदा ने राजा पूरन सिंह का किरदार निभाया। अंग्रेजों के शासन के दौरान किसानों पर लगान का बोझ और गांव वालों का संघर्ष फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा है। राजा पूरन सिंह का किरदार स्थानीय सत्ता, सामाजिक जिम्मेदारी और अंग्रेजी शासन के दबाव के बीच खड़ा नजर आता है।वेब सीरीज मिर्जापुर में कुलभूषण खरबंदा ने सत्यानंद त्रिपाठी यानी बाबूजी का किरदार निभाया। वह कालीन भैया के पिता हैं और त्रिपाठी परिवार की सत्ता व पारिवारिक समीकरणों में उनकी अहम भूमिका है। उनका गंभीर व्यक्तित्व, कठोर रवैया और सत्ता के प्रति नजरिया इस किरदार को जटिल बनाता है। ओटीटी पर भी उन्होंने अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींचा।