भारतीय राज्यों के व्यंजन Source: Pinterest
पारंपरिक भारतीय व्यंजन: भारत में स्वाद हर कुछ किलोमीटर पर बदल जाता है। कहीं घी में डूबी बाटी, तो कहीं नारियल के दूध वाला स्टू। जलवायु, फसल और त्योहारों ने हर राज्य को अपना अलग पारंपरिक व्यंजन दिया है। आइए चलते हैं स्वाद के सफर पर, 10 राज्यों के 10 मशहूर व्यंजनों के साथ।राजस्थान दाल-बाटी-चूरमा: राजस्थान की सूखी और गर्म जलवायु में लंबे समय तक टिकने वाला भोजन बनाने की परंपरा रही है। गेहूँ के आटे की बाटियों को पारंपरिक रूप से अंगारों या तंदूर में सेंका जाता है और फिर घी में डुबोकर पंचमेल दाल के साथ परोसा जाता है। बाटी को कूटकर घी और गुड़ या शक्कर में मिलाने से बनता है मीठा चूरमा।गुजरात का ढोकला: चने की दाल और चावल या बेसन के खमीर उठे घोल से भाप में पकाया गया ढोकला गुजरात की पहचान है। ऊपर से सरसों, करी पत्ता और हरी मिर्च का तड़का और साथ में हरी चटनी इसका स्वाद बढ़ाते हैं। भाप में बनने के कारण यह हल्का होता है और नाश्ते व मेहमाननवाजी, दोनों में पसंद किया जाता है।पंजाब का सरसों का साग और मक्के की रोटी: सर्दियों में पंजाब के घरों में यह जोड़ी ख़ास होती है। सरसों के पत्तों और पालक या बथुआ जैसी हरी सब्ज़ियों को अदरक-लहसुन के साथ धीमी आँच पर घंटों पकाया जाता है और मक्के के आटे से गाढ़ा किया जाता है। गरमा-गरम मक्के की रोटी पर सफेद मक्खन, गुड़ और साथ में लस्सी इसे पूरा बनाते हैं।उत्तर प्रदेश का अवधी दम बिरयानी: अवध की नवाबी रसोई "दम पुख़्त" शैली के लिए जानी जाती है, जिसमें भोजन को बर्तन का मुँह बंद करके धीमी आँच पर पकाया जाता है। इससे मसालों की ख़ुशबू और स्वाद भीतर ही बने रहते हैं। लखनऊ की दम बिरयानी हल्के मसालों, केसर और इत्र जैसी सुगंध के लिए पहचानी जाती है। इस शैली का संबंध नवाबों के दौर से माना जाता है।बिहार का लिट्टी-चोखा: गेहूँ के आटे की लोई में भुने चने का सत्तू, अजवाइन, नींबू और अचार वाले मसाले भरकर लिट्टी बनाई जाती है। इसे पारंपरिक रूप से कोयले या उपलों की आग पर सेंका जाता है और घी में डुबोकर परोसा जाता है। साथ में होता है चोखा, यानी भुने बैंगन, आलू और टमाटर में सरसों का कच्चा तेल, प्याज़ और हरी मिर्च। यह सादा पर भरपूर ऊर्जा देने वाला भोजन माना जाता है।पश्चिम बंगाल का माछेर झोल और भात: "माछे-भाते बंगाली" कहावत बंगाल की थाली की झलक देती है। रोहू, कतला या हिल्सा जैसी मछली को हल्दी, जीरे और सरसों के तेल के साथ हल्के झोल में पकाया जाता है और गरम भात के साथ परोसा जाता है। मसालों का संतुलित इस्तेमाल मछली के अपने स्वाद को उभारता है। मानसून में हिल्सा खास तौर पर पसंद की जाती है।महाराष्ट्र का पूरन पोली: चने की दाल और गुड़ की मीठी भरावन से भरी, घी में सिकी यह रोटी महाराष्ट्र के त्योहारों का अहम हिस्सा है। इलायची और जायफल की खुशबू इसका स्वाद बढ़ाती है। गुड़ी पड़वा और होली जैसे अवसरों पर इसे खास तौर पर बनाया जाता है। इसे दूध, कटोरी भर घी या कटी हुई आमटी के साथ खाने का चलन है।केरल का अप्पम और स्टू: खमीर उठे चावल के घोल और नारियल से बने अप्पम के किनारे कुरकुरे और बीच का हिस्सा मुलायम होता है। इसके साथ परोसा जाने वाला स्टू नारियल के दूध में सब्जियों या चिकन को हल्के मसालों के साथ पकाकर बनता है। केरल में नारियल, चावल और मसालों की भरपूर उपलब्धता इस जोड़ी को स्वाद और सुगंध दोनों देती है।तमिलनाडु का पोंगल: पोंगल तमिलनाडु का फसल कटाई का त्योहार भी है और इसी नाम का व्यंजन भी। नए चावल को मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है और उसके उफनने को समृद्धि का संकेत माना जाता है। वेन पोंगल में चावल और मूँग दाल के साथ काली मिर्च, जीरा, काजू और घी होता है। वहीं सक्कराई पोंगल गुड़ और इलायची से मीठा बनता है।ओडिशा का पखाल भात: पके चावल को पानी में भिगोकर हल्का खमीर उठाया जाता है, यही है पखाल भात। इसे नमक, दही, नींबू, भुनी मछली, बड़ी चूरा या साग के साथ खाया जाता है। गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देने वाला भोजन माना जाता है। ओडिशा में हर साल 20 मार्च को पखाल दिवस भी मनाया जाता है। भारत की थाली की विविधता बताती है कि स्वाद ही हमारी साझी विरासत है।