दशहरा शस्त्र पूजन डिजाइन फोटो
शस्त्र पूजा, जिसे दक्षिण भारत में आयुध पूजा भी कहते हैं, नवरात्रि के अंतिम दिनों में, यानी नवमी या विजयादशमी पर की जाती है। इसमें शस्त्रों, औजारों और उपकरणों का तिलक, फूल और दीप से पूजन किया जाता है। यह परंपरा शक्ति, साहस और अच्छाई की रक्षा के भाव से जुड़ी है।देवी माहात्म्य के अनुसार महिषासुर के अत्याचार से परेशान देवताओं ने अपनी शक्तियों से माँ दुर्गा को प्रकट किया। हर देवता ने उन्हें अपना अस्त्र दिया, जैसे शिव ने त्रिशूल और विष्णु ने चक्र। माना जाता है कि इन्हीं शस्त्रों से देवी ने महिषासुर का वध किया, इसलिए नवरात्रि के बाद शस्त्रों का पूजन शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।कुछ ग्रंथों और लोक-परंपरा के अनुसार श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले देवी शक्ति की आराधना की और विजय का आशीर्वाद पाया। विजयादशमी को रावण पर राम की जीत का दिन माना जाता है। इसी भाव से इस दिन शस्त्रों को पूजकर धर्म और न्याय की रक्षा का संकल्प लिया जाता है।महाभारत के विराट पर्व में उल्लेख है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र एक शमी के पेड़ पर छिपा दिए थे। माना जाता है कि अज्ञातवास पूरा होने पर उन्होंने शमी की पूजा कर शस्त्र वापस लिए और उन्हीं के बल पर आगे विजय पाई। इसी कारण कई जगह दशहरे पर शमी पूजन भी किया जाता है।प्राचीन काल से क्षत्रिय राजाओं और योद्धाओं के लिए विजयादशमी नए अभियानों की शुरुआत का दिन माना जाता रहा है। इस दिन सेनाएँ अपने शस्त्र पूजकर सीमोल्लंघन यानी सीमा पार करने की रस्म निभाती थीं। राजपूत और मराठा परंपराओं में यह चलन खास तौर पर प्रचलित रहा है।पूजा से पहले शस्त्र को साफ करें और पूजा स्थान पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर रखें। फिर तिलक लगाएँ, फूल और मौली चढ़ाएँ, दीप दिखाएँ और मन में सुरक्षा व सदुपयोग का संकल्प लें। पूजा के बाद प्रसाद बाँटें। यह सब श्रद्धा और सावधानी के साथ, परिवार की रीति के अनुसार किया जाता है।कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में आयुध पूजा में औजारों, मशीनों, वाहनों और किताबों की पूजा होती है। मैसूरु दशहरे में शाही परिवार और राजमहल में भी आयुध पूजा की परंपरा है। कई जगह इसी दौरान माँ सरस्वती की पूजा भी होती है, जो ज्ञान के सम्मान का प्रतीक है।देश के कई सैन्य और पुलिस प्रतिष्ठानों में विजयादशमी पर शस्त्र पूजा आज भी की जाती है। आयुध कारखानों और कई उद्योगों में मशीनों व औजारों का पूजन होता है। 2019 में फ्रांस में पहला राफ़ेल विमान मिलने पर तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शस्त्र पूजा की थी।शस्त्र पूजा का भाव यह नहीं कि हिंसा को बढ़ावा दिया जाए। इसका संदेश है कि शक्ति का इस्तेमाल अन्याय के विरुद्ध, रक्षा और संयम के साथ हो। आज के दौर में कलम, औजार, मशीनें और वाहन भी हमारी आजीविका के साधन हैं, इसलिए उनका सम्मान करना इसी परंपरा का आधुनिक रूप माना जा सकता है।शस्त्र पूजा सिर्फ कानूनी रूप से रखे गए और लाइसेंस वाले शस्त्रों के साथ ही करें। आग्नेयास्त्र पूजा से पहले खाली और सुरक्षित रखें और बच्चों से दूर रखें। शस्त्रों का प्रदर्शन या हवाई फायरिंग जैसी हरकतें कानूनन अपराध और खतरनाक हैं। सम्मान, संयम और सुरक्षा के साथ यह परंपरा निभाएँ।