डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम डिजाइन फोटो
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APJ Abdul Kalam: अखबार बेचने से मिसाइल मैन बनने तक की प्रेरक कहानी, आखिर क्यों कहा जाता है जनता का राष्ट्रपति

Dr. APJ Abdul Kalam Birth Anniversary : डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर देखें तस्वीरों में उनका सफर रामेश्वरम के बचपन से मिसाइल कार्यक्रम, राष्ट्रपति पद व विद्यार्थियों से जुड़ाव की 10 प्रेरक बातें।

अंकिता पटेल
रामेश्वरम की साधारण गलियों से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज भी करोड़ों युवाओं के आदर्श हैं। उनकी 95वीं जयंती पर तस्वीरों में जानिए "मिसाइल मैन" के जीवन की 10 प्रेरक बातें।
अवुल पकीर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ। पिता जैनुलाबदीन नाव चलवाने का काम करते थे और माँ आशियम्मा गृहिणी थीं। संसाधन सीमित थे, पर घर में मूल्यों और आपसी प्रेम की कोई कमी नहीं थी।
परिवार की मदद के लिए कलाम ने बचपन में अखबार बाँटने का काम किया। सुबह-सुबह अखबार पहुँचाने के बाद वे स्कूल जाते और पढ़ाई में भी आगे रहते। उनके शिक्षक उन्हें जिज्ञासु और मेहनती विद्यार्थी के रूप में याद करते थे। कठिनाइयों के बीच भी सीखने की ललक उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
बचपन में पक्षियों को उड़ते देखकर कलाम के मन में उड़ान का आकर्षण जागा। आगे चलकर उन्होंने तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी की पढ़ाई की और फिर मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में आगे बढ़े। यहीं से उनके वैज्ञानिक सपनों को ठोस दिशा मिली।
पढ़ाई पूरी करने के बाद 1958 के आसपास उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़कर करियर शुरू किया। शुरुआती वर्षों में उन्होंने एक छोटे होवरक्राफ्ट के डिजाइन पर भी काम किया। बताया जाता है कि यहीं से उनके भीतर नई तकनीक विकसित करने का आत्मविश्वास बना।
1960 के दशक के मध्य में वे ISRO से जुड़े और भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च वाहन एसएलवी-3 परियोजना में अहम भूमिका निभाई। जुलाई 1980 में इसी रॉकेट से "रोहिणी" उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया गया। इस सफलता ने भारत को अंतरिक्ष क्षमता वाले चुनिंदा देशों में खड़ा कर दिया।
1980 के दशक में डॉ. कलाम DRDO लौटे और एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम का नेतृत्व किया। इसके तहत अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी मिसाइलें विकसित की गईं। अग्नि का पहला परीक्षण 1989 में हुआ। इसी योगदान के कारण उन्हें "मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" कहा जाने लगा।
मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों में डॉ. कलाम की प्रमुख भूमिका रही। उस समय वे प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और DRDO के सचिव थे। इन परीक्षणों से भारत की रक्षा क्षमता में नया आत्मविश्वास आया। 1997 में उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिल चुका था।
25 जुलाई 2002 को डॉ. कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति बने और 2007 तक इस पद पर रहे। एक वैज्ञानिक का देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना अपने आप में अनूठा था। सादगी, खुलेपन और आम लोगों से मिलने-जुलने के अंदाज ने उन्हें "जनता का राष्ट्रपति" की पहचान दिलाई।
राष्ट्रपति पद के बाद भी डॉ. कलाम का सबसे बड़ा जुड़ाव विद्यार्थियों से रहा। वे स्कूल-कॉलेजों में जाकर बच्चों से संवाद करते और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे। "विंग्स ऑफ फायर", "इंडिया 2020" और "इग्नाइटेड माइंड्स" जैसी उनकी पुस्तकें आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करती हैं। उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा "विश्व विद्यार्थी दिवस" घोषित किया गया है।
27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलॉन्ग में विद्यार्थियों को संबोधित करते समय डॉ. कलाम का निधन हो गया। उनके अंतिम क्षण भी शिक्षा और युवाओं को समर्पित रहे। रामेश्वरम में उनका स्मारक आज भी लोगों को प्रेरित करता है। सादगी, मेहनत और बड़े सपने यही उनकी सीख है।

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