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15 अक्टूबर को पुसद तहसील कार्यालय की राजस्व टीम के सामने से अवैध रेत परिवहन में शामिल दो ट्रैक्टर फरार हो गए।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कुछ लोग अधिकारियों की गतिविधियों की जानकारी फोन के जरिए रेत तस्करों तक पहुंचाते हैं।
ट्रैक्टर चालक कार्रवाई की भनक लगते ही खेतों और पगडंडियों से होकर निकल जाते हैं।
Panganga River Sand Smuggling: पैनगंगा नदी के पात्र से जारी अवैध रेत उत्खनन और तस्करी के कारण नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर खतरा मंडरा रहा है। एक ओर नदी के पात्र का स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रेत तस्करों के मुखबिरों और वैकल्पिक रास्तों के कारण राजस्व विभाग की कार्रवाई में बाधाएं आ रही हैं।
15 अक्टूबर को पुसद तहसील कार्यालय की टीम के सामने से ही अवैध रेत परिवहन करने वाले दो ट्रैक्टर फरार हो गए। इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुसद तहसील कार्यालय के नायब तहसीलदार पवार ने पदभार संभालने के बाद राजस्व विभाग की टीम के साथ पैनगंगा नदी किनारे स्थित देवगव्हाण क्षेत्र का दौरा किया।
इस दौरान नदी पात्र से रेत निकालकर परिवहन कर रहे दो ट्रैक्टर टीम की नजरों के सामने से ही निकल भागे। इस टीम में शेंबालपिंपरी के पटवारी आडे और इसापुर बांध के पटवारी गावंडे भी शामिल थे। पटवारी आहे ने दो ट्रैक्टरों के फरार होने की पुष्टि की, क्षेत्र में चर्चा है कि राजस्व विभाग की टीम की गतिविधियों की जानकारी तस्करों तक पहले ही पहुंच जाती है।
आरोप है कि शेंबालपिंपरी गांव में इसापुर बांध के प्रवेश द्वार के पास, बाई नहर के परिसर में, बस स्टैंड और मुलावा फाटे पर कुछ लोग अधिकारियों के वाहनों की जानकारी फोन के जरिए तस्करों तक पहुंचाते हैं। इसके कारण कार्रवाई की भनक लगते ही ट्रैक्टर चालक वैकल्पिक रास्तों और खेतों से गुजरने वाले पगडंडी मागों का इस्तेमाल कर फरार हो जाते हैं।
शेंबालपिंपरी गांव से महज दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर पैनगंगा नदी बहती है। इस वर्ष बारिश कम होने के कारण इसापुर बांध पूरी क्षमता से नहीं भर पाया। परिणामस्वरूप, बांध के वेस्टवियर से नदी पात्र में पानी नहीं छोड़ा गया, जिरस्से नदी में जलस्तर घट गया है। कई स्थानों पर नदी का पात्र सूख गया है और रेत खुलकर दिखाई देने लगी है।
इसी का फायदा उठाकर अवैध रेत उत्खनन किए जाने की तस्वीर सामने आ रही है। अनियंत्रित रेत उत्खनन के कारण नदी पात्र में मौजूद पेड़-पौधों, वनस्पतियों और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।