यवतमाल खरीफ फसल-फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया) 
यवतमाल

यवतमाल में 7.60 लाख हेक्टेयर फसल पर दोबारा बुवाई का संकट, किसान बारिश का इंतजार कर रहे

Yavatmal Low Rainfall: यवतमाल जिले में बारिश नहीं होने से 7.60 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल पर दोबारा बुवाई का संकट गहरा गया है। सोयाबीन और कपास की फसल प्रभावित हो रही है।

आंचल लोखंडे

Yavatmal Kharif Crop: यवतमाल जिले में पिछले आठ-दस दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। शुरुआती अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर खरीफ की बुवाई पूरी कर ली थी, लेकिन अब वर्षा का लंबा अंतराल पड़ने से खेतों में उगी कोमल फसलें मुरझाने लगी हैं। जिले में करीब 84 प्रतिशत यानी 7 लाख 60 हजार 329 हेक्टेयर क्षेत्र में दोबारा बुवाई की आशंका पैदा हो गई है। किसान अब राहत की बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

मानसून की देर से शुरुआत होने के बावजूद बारिश आते ही किसानों ने कर्ज लेकर और अपनी जमा-पूंजी खर्च कर सोयाबीन, कपास, अरहर सहित विभिन्न खरीफ फसलों की बुवाई की थी। शुरुआती दिनों में पर्याप्त नमी मिलने से अंकुरण अच्छा हुआ, लेकिन दो से चार पत्तियां निकलने के बाद बारिश थम गई। लगातार धूप और मिट्टी में नमी की कमी से पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। सबसे अधिक असर सोयाबीन और कपास की फसल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

किसानों की बढ़ी चिंता

इस वर्ष बीज, खाद, कीटनाशक और खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है. वहीं कई क्षेत्रों में नकली और घटिया बीजों के कारण किसानों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. महंगे बीज खरीदने के बावजूद अपेक्षित अंकुरण नहीं होने से किसानों के सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है।

319 शिकायतें नकली बीजों की

खरीफ सीजन की शुरुआत में ही जिले के विभिन्न हिस्सों से बीजों की कम अंकुरण क्षमता को लेकर 319 शिकायतें सामने आई हैं। किसानों का आरोप है कि महंगे बीज खरीदने के बावजूद फसल अपेक्षित रूप से नहीं उगी, जिससे अब उन्हें दोबारा बीज, मजदूरी और जुताई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान फिर गलत साबित

मौसम विभाग ने पिछले कई दिनों से जिले में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन वास्तविकता में अपेक्षित वर्षा नहीं हुई। इससे किसानों में मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। बारिश के अनुमान के आधार पर खेती का पूरा कार्यक्रम तय करने वाले किसानों का कृषि प्रबंधन भी प्रभावित हुआ है।

अगले दो-तीन दिन होंगे निर्णायक

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले दो से तीन दिनों में जिले में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो बड़े पैमाने पर दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इस समय होने वाली वर्षा खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर बारिश होने पर फसलों को नई जीवनशक्ति मिल सकती है, अन्यथा उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

जिले में खरीफ फसलों की बुवाई (हेक्टेयर में)

फसल क्षेत्र (हेक्टेयर)
कपास 4,42,722
सोयाबीन 2,20,278
अरहर (तुअर) 93,960
मूंग 811
उड़द 845
ज्वार 763
अन्य अनाज 221
बाजरा 3
तिल 14

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