Yavatmal Hostel Employees: राज्य के 2388 अनुदानित छात्रावासों में कार्यरत कर्मचारी शासन-प्रशासन की उदासीन नीतियों के कारण आधे मानधन पर 24 घंटे सेवा देने को मजबूर हैं। पिछले तीन-चार वर्षों से कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर मंत्रालय के चक्कर लगा रहे हैं। लंबित मांगों के संबंध में सामाजिक न्याय विभाग को कई बार निवेदन दिए गए। अनेक प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन कैबिनेट में निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष का वातावरण निर्माण हुआ है। इसी के चलते कर्मचारियों ने 9 अगस्त से यवतमाल जिला परिषद के सामने धरना आंदोलन शुरू करते हुए आमरण अनशन शुरू किया है।
सामाजिक न्याय विभाग के शासन निर्णय के अनुसार शासन जितना मानधन देता है, उतना ही मानधन संबंधित संस्था द्वारा देना अनिवार्य है। इस संबंध में समाज कल्याण आयुक्तालय, पुणे विभाग ने कई बार जिला समाज कल्याण कार्यालय को शासन नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
लेकिन स्थानीय स्तर पर इस मामले में केवल अनदेखी की गई। स्थानीय स्तर पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण राज्य के छात्रावास कर्मचारियों का नियमानुसार लगभग 1250 करोड़ रुपये वेतन बकाया है। इस बकाया राशि का भुगतान शासन द्वारा किया जाए, इस मांग को लेकर राज्य कर्मचारी संघ के कार्याध्यक्ष प्रदीप वाकपैजन ने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है। वर्तमान में छात्रावास अधीक्षक को 10000 रुपये, रसोइया को 8500 रुपये, जबकि सहायक और चौकीदार को 7500 रुपये प्रतिमाह मानधन दिया जाता है। इसमें से केवल 50 प्रतिशत राशि शासन द्वारा दी जाती है, लेकिन अधिकांश संबंधित संस्थाएं अपना 50 प्रतिशत हिस्सा भी कर्मचारियों को नहीं देती हैं।
कर्मचारियों को समान काम समान वेतन के आधार पर वेतन श्रेणी लागू की जाए, सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग मंत्रालय, मुंबई में लंबित कर्मचारी वेतन प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी जाए, शासन निर्णय 16 मार्च 1998 के वेतन नियमों को लागू कर बकाया वेतन कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा किया जाए, कर्मचारी मानधन पर कार्यरत रहने तक सेवानिवृत्ति आयु सीमा में छूट दी जाए और कार्यक्षमता के संबंध में चिकित्सा अधिकारी का प्रमाणपत्र मान्य किया जाए, 20 मई 2025 को सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग मंत्रालय की बैठक में मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल किया जाए आदि मांगे रखी गई है।