यवतमाल वन मजदूर मौत  (सोर्सः सोशल मीडिया)
यवतमाल

बकाया मजदूरी और नौकरी से हटाए जाने पर वन मजदूर की आत्महत्या, यवतमाल कलेक्टर कार्यालय में शव रखकर प्रदर्शन

Yavatmal Collector Office Protest: यवतमाल में वन मजदूर रमाशंकर शुक्ला की मौत के बाद परिजनों और मजदूरों ने कलेक्टर कार्यालय में शव रखकर प्रदर्शन किया। चार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

आंचल लोखंडे

Yavatmal Forest Worker Death: हक की मजदूरी और बकाया देयकों के लिए संघर्ष कर रहे पुसद सामाजिक वनीकरण विभाग के दैनिक वेतनभोगी वन मजदूर तथा वन मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष रमाशंकर शुक्ला की सोमवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। उन्होंने कथित रूप से विभागीय अधिकारियों द्वारा काम से हटाए जाने और बकाया राशि नहीं मिलने से परेशान होकर जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया था। शुक्ला की मौत के बाद आक्रोशित परिजन और वनमजदूर मृतक का शव सीधे यवतमाल जिला कलेक्टर कार्यालय लेकर पहुंचे।

वहां शव को कलेक्टर के कक्ष में रखकर मृतक के परिजनों और वनमजदूरों ने पुसद सामाजिक वनीकरण विभाग के चार अधिकारियों को शुक्ला की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई और सेवा से बर्खास्त करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन नहीं मिलता, तब तक शव कलेक्टर कार्यालय से नहीं हटाया जाएगा।

परिजनों ने 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की

जानकारी के अनुसार, 20 अगस्त को यवतमाल के संविधान चौक क्षेत्र स्थित प्रकाश लॉज में रमाशंकर शुक्ला ने जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया था। इससे पहले उन्होंने कथित तौर पर 11 पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा था। गंभीर अवस्था में उन्हें शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान सोमवार को उनकी मौत हो गई।

अधिकारियों को मौत का जिम्मेदार ठहराया

परिजनों और वनमजदूर संगठन का आरोप है कि रमाशंकर शुक्ला सामाजिक वनीकरण विभाग में पंजीकृत वनमजदूर के रूप में कई वर्षों से कार्यरत थे। हाल ही में मजदूरों से संबंधित योजना समाप्त होने का कारण बताते हुए उन्हें काम से हटा दिया गया था, साथ ही, पहले किए गए कार्य का मेहनताना और अन्य देयक भी उन्हें नहीं मिले थे। आरोप है कि बकाया राशि के लिए शुक्ला ने संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क और पत्राचार किया, लेकिन उनकी मांगों की अनदेखी की गई। मृतक की पत्नी और बेटी ने सामाजिक वनीकरण विभाग के चार अधिकारियों को उनके पिता और पति की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की।

सुसाइड नोट पुलिस ने लिया अपने कब्जे में

परिजनों के अनुसार, रमाशंकर शुक्ला ने मौत से पहले 11 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। इस नोट में किन लोगों अथवा अधिकारियों के संबंध में क्या आरोप लगाए गए हैं और उनकी आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियां क्या थीं, इसकी जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कलेक्टर कार्यालय में तनाव व्याप्त रहा

घटना के दौरान जिला कलेक्टर विकास मीना महत्वपूर्ण बैठक के लिए कार्यालय से बाहर जा चुके थे। उनके कक्ष में शव रखे जाने से कलेक्टर कार्यालय परिसर में संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति बन गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए निवासी उपजिलाधिकारी अनिरुद्ध बक्षी ने मृतक के परिजनों और वनमजदूर संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का आश्वासन देते हुए परिजनों से शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की अपील की। प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद दोपहर में परिजन रमाशंकर शुक्ला का शव वहां से उनके निवास स्थान के लिए ले गए।

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