जनवरी से सितंबर 2026 तक यवतमाल जिले में 220 किसानों की आत्महत्या दर्ज।
सितंबर में 39 और अगस्त में 34 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए।
बारिश में लंबे अंतराल से कपास, सोयाबीन और अरहर की फसल प्रभावित।
सोयाबीन में दाने नहीं भरने और कपास के पत्ते व बोंड झड़ने की आशंका।
फसल नुकसान का जायजा लेने केंद्रीय दल ने जिले के खेतों का निरीक्षण किया।
Yavatmal Farmer Suicides Drought Crisis Crop Loss: यवतमाल जिले में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 220 किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई, जिनमें 39 मामले सितंबर के हैं। बारिश में लंबे अंतराल, फसल नुकसान, बढ़ती खेती लागत और कर्ज के दबाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
यवतमाल, खेती की बढ़ती लागत, कर्ज के दबाव और फसल नुकसान के बीच यवतमाल जिले में किसानों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जनवरी से सितंबर 2026 तक जिले में 220 किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई है। इनमें अकेले सितंबर महीने के 39 मामले शामिल हैं। अगस्त में भी 34 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए थे। दो महीनों में दर्ज 73 मामलों ने जिले में कृषि संकट की गंभीरता को फिर सामने ला दिया है।
इस वर्ष बारिश में लंबे अंतराल के कारण खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। उत्पादन घटने की आशंका के बीच किसानों के सामने खेती पर किए गए खर्च की भरपाई करना भी चुनौती बन गया है।
अगस्त और सितंबर में बारिश का लंबा अंतराल रहा। फसलों की वृद्धि के महत्वपूर्ण समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कपास, सोयाबीन, अरहर और अन्य फसलों पर असर पड़ा है। तेज धूप के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं।
सोयाबीन की फलियों में दाने ठीक से नहीं भरने और कपास के पत्ते व बोंड झड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। फसल की स्थिति बिगड़ने से किसानों की आमदनी पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
बुआई से लेकर खाद, बीज, कीटनाशक और फसल की देखभाल तक किसानों को लगातार खर्च करना पड़ता है। लेकिन फसल खराब होने और उत्पादन घटने की आशंका के कारण यह लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कर्ज का बोझ और सरकारी सहायता मिलने में देरी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है।
ऐसे हालात में किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिले में किसान आत्महत्या के मामलों के आंकड़े भी कृषि संकट की गंभीरता की ओर ध्यान दिलाते हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले के व्यक्तिगत कारणों की पुष्टि अलग-अलग जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
जिले में सूखे और फसल नुकसान की स्थिति का जायजा लेने हाल ही में केंद्रीय दल ने दौरा किया। दल के सदस्यों ने खेतों में पहुंचकर कपास, सोयाबीन और अरहर की फसलों का निरीक्षण किया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में वार्षिक औसत की तुलना में करीब 31 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। बारिश में लंबे अंतराल ने फसलों की वृद्धि को प्रभावित किया है। अब किसानों को फसल नुकसान के आकलन, सरकारी सहायता और राहत उपायों के क्रियान्वयन का इंतजार है।