घरों में ड्रम का पानी चेक करते परीक्षक (फोटो नवभारत) 
यवतमाल

डेंगू पर लगाम! यवतमाल में जुलाई से अक्टूबर तक घर-घर सर्वेक्षण, जिला प्रशासन चला रहा अभियान

Yavatmal News: यवतमाल जिले में डेंगू रोकथाम के लिए जुलाई से अक्टूबर 2025 तक घर-घर सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है। बर्तनों में लार्वा मिलने पर टेमीफॉस का उपयोग, साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा दी जा रही।

आकाश मसने

Yavatmal Dengue Prevention News: डेंगू मच्छरों द्वारा फैलने वाला एक वायरल रोग है। यह रोग मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू रोग के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के पांच से सात दिन बाद दिखाई देते हैं। डेंगू बुखार फ्लू जैसा ही बुखार है। एडीज मच्छर के शरीर पर सफेद धारियां होती हैं। इसलिए इसे टाइगर मच्छर भी कहा जाता है। यह मच्छर दिन में काटता है। इसे पूर्ण मच्छर बनने में कम से कम 7 से 10 दिन लगते हैं। यह मच्छर घरेलू पानी के बर्तनों, ड्रमों, कुंडों, सीमेंट की टंकियों, गमलों, क्षतिग्रस्त टायरों और प्लास्टिक कचरे आदि में जमा पानी में पनपता है।

यवतमाल जिले के सभी नगरीय क्षेत्रों में डेंगू के मरीजों को नियंत्रित करने के लिए, जिलाधिकारी ने नगर परिषद और नगर पंचायत के मुख्याधिकारी को एक प्रजनन परीक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए थे और तदनुसार, जुलाई महीने से स्वास्थ्य सेविका, आशा स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से नियमित घर का दौरा करके एक सर्वेक्षण किया जा रहा है।

एक परीक्षक कर रहा 45 से 50 घरों का निरीक्षण

जिलाधिकारी विकास मीना, सिईओ मंदार पत्की और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुभाष ढोले के दिशानिर्देशों के अनुसार और डॉ. तनवीर शेख, मुख्याधिकारी डॉ. सचिन गाडे, और डॉ. समीर के नेतृत्व में, यह पहल नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत सभी वार्डों में लागू की जा रही है। नगर परिषद के माध्यम से एक प्रजनन परीक्षक का चयन किया गया है और प्रतिदिन 45 से 50 घरों का दौरा किया गया है।

इस भ्रमण के दौरान, निवासी कार्यकर्ता टॉर्च की सहायता से घर में बर्तन, ड्रम, कूलर, गमले, घिसे हुए टायर, प्लास्टिक कचरा आदि का सर्वेक्षण करते हैं। जिन बर्तनों में मच्छरों के लार्वा पाए जाते हैं, उन्हें खाली कर दिया जाता है और जो बर्तन खाली करने योग्य नहीं होते, उन्हें टेमीफॉस घोल डालकर नष्ट कर दिया जाता है।

मच्छरों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा दी जा रही है। यह सर्वेक्षण महीने में दो बार किया जा रहा है। इस पहल को जुलाई से अक्टूबर 2025 तक लागू करने का आदेश दिया गया है।

जागरूकता के उपाय किए जा रहे युद्धस्तर पर

मुख्याधिकारी डॉ. सचिन गाडे ने बताया ने बताया कि कीट जनित बीमारियों, टेमीफॉस गतिविधि के साथ-साथ निवारक उपायों आदि के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए वसति सेविका, आशा स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मदद से यह अभिनव पहल युद्धस्तर पर नियमित रूप से की जा रही है। इसलिए, आने वाले समय में वणी शहर में डेंगू संक्रमित रोगियों की संख्या को नियंत्रित करना संभव होगा।

उप मुख्याधिकारी सोनटक्के, अभियान प्रबंधक पूर्णिमा शिरभाते, साथ ही तालुका स्वास्थ्य पर्यवेक्षक नरेश मेश्राम, हेमंत दुधे, विजय पेंदोरकर इस सर्वेक्षण अभियान को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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