Wardha Prahar Teacher Organization: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के तहत बीएलओ के रूप में नियुक्त शिक्षकों के निलंबन को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर प्रहार शिक्षक संगठन ने नागपुर विभाग प्रमुख अजय भोयर के नेतृत्व में जिलाधिकारी को निवेदन सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि निलंबन वापस नहीं लिया गया तो सभी बीएलओ शिक्षकों के साथ जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जाएगी।
ज्ञापन में महिला आश्रम बुनियादी प्राथमिक विद्यालय, वर्धा के सहायक शिक्षक गजानन माहुरे, यशवंत विद्यालय, सेलू की सहायक शिक्षिका धनश्री राऊत तथा रवींद्रनाथ टैगोर हाईस्कूल, सिंदी (मेघे) के प्रयोगशाला परिचर सुनील कोंडलकर के निलंबन को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षक नियमित शैक्षणिक कार्यों के साथ सुबह से देर रात तक एसआईआर का कार्य कर रहे हैं।
मतदाताओं को गणना (एन्यूमरेशन) फॉर्म वितरित करने के बावजूद कई लोग समय पर फॉर्म वापस नहीं करते, आवश्यक दस्तावेज और फोटो उपलब्ध नहीं कराते तथा कई बार घर पर भी नहीं मिलते। इससे शिक्षकों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं स्थानांतरित और मृत मतदाताओं से संबंधित पंचनामे तैयार करने में भी उन्हें अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने यह भी कहा कि सुनील कोंडलकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने के बावजूद उन्हें एसआईआर के तहत डिजिटलाइजेशन का कार्य सौंपा गया था। संगठन ने यह भी मांग की कि बीएलओ के रूप में कार्यरत सभी शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। अन्यथा जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष सभी बीएलओ शिक्षकों के साथ निश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी तथा कोविड-19 काल में जिला प्रशासन द्वारा प्रदान किए गए सम्मान-पत्र और पुरस्कार भी वापस कर दिए जाएंगे।
इस समय प्रहार शिक्षक संघटन के धनराज कावटे, मुकेश इंगोले, दत्तात्रय राऊळकर, मनीष मारोडकर, अविनाश धात्रक, संतोष महाजन, रहीम शहा, प्रदीप भट, दिनेश नौकरकर, अजय सावरकर, गजानन कोरडे, शैलेश भोसले, राजीव धात्रक, निरंजन चव्हाण, कुंडलिक राठोड, अमोल वाशिमकर, महेन्द्र माने, कैलाश भोयर, निलेश महल्ले, नरेश कुटेमाटे, प्रणोज बनकर, किशोर ढंगरे, डी एस राऊत, आदि उपस्थित थे।
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प्रहार शिक्षक संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लगातार समयसीमा, देर रात तक आने वाले फोन, तकनीकी समस्याओं तथा डिजिटलाइजेशन संबंधी दिक्कतों के कारण बीएलओ शिक्षक भारी मानसिक तनाव में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी वास्तविक परेशानियों और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों पर विचार किए बिना निलंबन की कार्रवाई की गई, जो पूरी तरह अनुचित है।