नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान (सोर्स: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

Tiger Reserve: मध्य भारत का संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर खतरे में! डेढ़ महीने में 2 शावकों समेत 2 बाघों की मौत

भंडारा जिला एक महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह 4 प्रमुख बाघ परियोजनाओं और एक वन्यजीव अभयारण्य से घिरा हुआ है। पिछले कुछ महीने से लगातार बाघों की मौत से इस पर खतरा मंडरा रहा है...

आकाश मसने

भंडारा: मध्य भारत अपने समृद्ध बाघ परिवेश के लिए प्रसिद्ध है नागपुर को विश्व की ‘टाइगर कैपिटल’ कहा जाता है। इसके नजदीक स्थित भंडारा जिला एक महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह 4 प्रमुख बाघ परियोजनाओं और एक वन्यजीव अभयारण्य से घिरा हुआ है। इस क्षेत्र के प्रादेशिक वनों से कई बाघ एक संरक्षित वन क्षेत्र से दूसरे में लगातार स्थानांतरित होते रहते हैं। हालांकि, पिछले डेढ़ महीने में दो शावकों और दो बाघों की मृत्यु से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर गंभीर संकट में है।

दक्षिण में उमरेड पौनी करहंडला वन्यजीव अभयारण्य और ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व, पूर्व में नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व, उत्तर में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और बालाघाट वन क्षेत्र, तथा उत्तर-पश्चिम में पेंच राष्ट्रीय उद्यान भंडारा जिले को चारों ओर से घेरते हैं। वर्षों के शोध से यह पता चला है कि भंडारा जिले की तुमसर, नाकाडोंगरी, लेंडेझरी, जांब कांद्री, पवनी, अडयाल, साकोली, लाखनी जैसी रेंज से बाघ लगातार स्थानांतरित होते रहते हैं।

नागझिरा क्षेत्र से बाघों का माइग्रेशन एक ऐतिहासिक पहलू रहा है। हालांकि नागझिरा के बाघों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। इसलिए, इस कॉरिडोर की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। हाल के वर्षों में प्रादेशिक वन क्षेत्रों के असंरक्षित जंगलों में बाघों की मृत्यु की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि वन विभाग बाघ संरक्षण में कमजोर साबित हो रहा है।

वन विभाग: टूथलेस टाइगर?

भंडारा स्थित वाइल्ड वॉच फाउंडेशन के सचिव शैलेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि वन विभाग बाघों की सुरक्षा में टूथलेस टाइगर साबित हो रहा है। जमीनी स्तर पर वन रक्षकों की जंगल में निरंतर उपस्थिति न होना एक बड़ा कारण है।

वनरक्षक, चौकीदार, गार्ड और अन्य फील्ड स्टाफ को संरक्षण के अलावा कई अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी लगाया जाता है, जिससे संरक्षण की ओर अनदेखी हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य वन विभाग को एक समर्पित "संरक्षण फोर्स" बनानी चाहिए, जो प्रादेशिक विभाग के असंरक्षित जंगलों में बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

डेढ़ महीने में 4 बाघों और 1 तेंदुए की मौत

  • 2025 के केवल डेढ़ महीने में भंडारा जिले में दो बाघों और उनके दो शावकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक तेंदुआ गंभीर रूप से घायल हुआ है। इस अवधि में भंडारा जिला बाघों की मृत्यु के मामलों में पड़ोसी गोंदिया जिले से आगे निकल चुका है।
  • 6 जनवरी: तुमसर वन क्षेत्र के पाचोरा में एक बाघ के शरीर के टुकड़े किए गए।
  • 11-12 फरवरी: लेंडेझरी वन क्षेत्र में दो शावकों में से एक मृत, दूसरा नागपुर के बचाव केंद्र में दम तोड़ा।
  • 13 फरवरी: लाखांदूर तहसील में तेंदुओं के बीच संघर्ष में एक तेंदुआ गंभीर रूप से घायल।
  • 17 फरवरी: नाकाडोंगरी वन क्षेत्र में एक बाघ मृत पाया गया।
  • गोंदिया जिले में नागपुर-रायपुर रेल मार्ग पर टोयागोंदी में ट्रेन से टकराकर एक तेंदुए की मौत (6 जनवरी), कहूका भानापूर में एक बाघ मृत (14 जनवरी)।
  • बढ़ती घटनाओं के बावजूद, वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। अगर जल्द ही प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो यह महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर संकट में पड़ सकता है।

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