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कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर महानगर पालिकाओं में महिला महापौरों के पतियों की सक्रिय भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हर्षाली योगेश चौधरी और अश्विनी कमलेश निकम उच्च शिक्षित हैं और कानून की डिग्री रखती हैं।
लेख के अनुसार, कमलेश निकम ने मनपा मुख्यालय में भाजपा नगरसेविका नीता नारायण पंजाबी के कक्ष के बाहर हंगामा किया था।
KDMC And Ulhasnagar Municipal Corporation: कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका और उल्हासनगर महानगर पालिका में शायद केंद्र और राज्य सरकार के महिला सशक्तीकरण का नारा बुलंद नहीं हो सका है। यही वजह है कि दोनों महानगर पालिकाओं में महिलाएं चुनाव जीतकर महापौर पद पर विराजमान तो हो गयीं हैं लेकिन दोनों मनपाओं में इन महिला महापौरों के पति देव ही महापौर कक्ष में ज्यादातर नजर आते हैं।
मनपा के आला अधिकारियों और ठेकेदारों को दिशा निर्देश देते नजर आते हैं और महापौर कार्यालय में बने एंटीचेंबर में बैठकर महत्वपूर्ण फैसले करते हुए दिखते हैं। जिससे उक्त दोनों महिला महापौर के पतियों को लोग सुपर महापौर कहने लगे हैं।
बता दें कि कल्याण- डोंबिवली महानगर पालिका और उल्हासनगर मनपा के आम चुनाव लंबे अरसे के बाद संपन्न हुए और आरक्षण के चलते दोनों मनपाओं में महिलाओं को शहर का प्रथम नागरिक महापौर का महत्वपूर्ण पद प्राप्त हुआ है। कल्याण- डोंबिवली मनपा में एडवोकेट हर्षाली योगेश चौधरी और उल्हासनगर मनपा में एडवोकेट अश्विनी कमलेश निकम महापौर बनी हैं। पहले उल्हासनगर मनपा की बात करें तो उल्हासनगर में महापौर अश्विनी निकम से ज्यादा उनके पति कमलेश निकम अपनी राजनीति चमकाने में नजर आ रहे हैं।
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण को मंचेकर गिरोह का खबरी बताते हुए कमलेश निकम ने सरेआम उल्हासनगर मनपा मुख्यालय में भाजपा नगरसेविका नीता नारायण पंजाबी के कक्ष के बाहर हंगामा किया और मनपा मुख्यालय को राजनीतिक युद्ध का मैदान बना दिया। मगर मनपा प्रशासन चुपचाप देखता रहा क्योंकि कमलेश निकम महापौर अश्विनी निकम के पति देव हैं । यदि कोई आम आदमी इस तरह से मनपा मुख्यालय के अंदर जाकर हंगामा करता तो शायद उस पर उल्हासनगर का सुरक्षा विभाग ही मामला दर्ज करवा देता । मगर कमलेश निकम तो सुपर महापौर हैं तो उनकी दबंगई तो चलेगी ही।
अब बात करें कल्याण- डोंबिवली महानगर पालिका की महापौर हर्षाली योगेश चौधरी की । तो इनके पति महोदय भी सुपर महापौर की तरह दिन भर महापौर कार्यालय में धुनी जमा कर बैठे रहते हैं । महापौर के मनपा में आगमन से लेकर घर जाने तक योगेश चौधरी मनपा में महापौर कार्यालय में और एंटी चेंबर में बैठे रहते हैं। हालांकि योगेश चौधरी, कमलेश निकम की तरह उग्र स्वभाव के नहीं हैं लेकिन महापौर हर्षाली चौधरी के तकरीबन सभी शासकीय और प्रशासकीय कार्य कथित तौर पर योगेश चौधरी ही देखते हैं ।
जहां आम नागरिकों को महापौर से मिलने के लिए पूर्व इजाजत लेनी पड़ती है वहीं दोनों मनपा में महापौर के पतियों को किसी की इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। क्योंकि सभी को लगता होगा कि यदि महिला महापौर है तो उसका पति सुपर महापौर होगा ही। कुल मिलाकर महिलाओं के सक्षमीकरण की बात कर महिलाओं को उच्च पदों पर विराजित करने वाले राजनीतिक दल यह क्यों नहीं देखते कि महिला नगरसेविकाओं का सारा कारभार उनके पति यानि कि सुपर महापौर ही देखते हैं ।
जबकि शिक्षा की बात करें तो दोनों मनपाओं की महापौर उच्च शिक्षित शिक्षित हैं दोनों को ही कानूनी डिग्री धारक यानी कि एडवोकेट हैं और निर्णय लेने में भी सक्षम हैं और उनको किसी सलाहकार की भी जरूरत नहीं हैं तो दोनों महिला महापौरों के पति देव यानी कि सुपर महापौर किस अधिकार से महापौर से भी ज्यादा समय महापौर कक्ष में बैठकर अधिकारी और ठेकेदारों से मीटिंग करते हैं। जबकि नियमानुसार सरकारी नियम के अनुसार कोई किसी सत्ताधारी पदों पर बैठे पदाधिकारियों के परिजन अधिकारियों को कोई दिशानिर्देश नहीं दे सकते है और शासन प्रशासन के कार्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं?