Ramdas Athawale Recites Poem For Abhijeet Dipke: संसद के ऊपरी सदन में जब भी केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले खड़े होते हैं, तो वहां केवल गंभीर चर्चा ही नहीं होती, बल्कि उनके विशेष अंदाज और तुकबंदी वाली कविताओं से सदन का माहौल भी बदल जाता है। हाल ही में नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के दौरान आठवले ने छात्र नेता अभिजीत दीपके के आंदोलन और उनके संघर्ष को लेकर अपनी सिग्नेचर शैली में एक कविता पढ़ी, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
आठवले ने अपने भाषण की शुरुआत में ही अभिजीत दीपके का जिक्र करते हुए कहा, अमेरिका से जो भारत आया था चुपके-चुपके, उनका नाम है अभिजीत दीपके। उन्होंने सदन को बताया कि अभिजीत दीपके उनके ही समाज से ताल्लुक रखते हैं और एक सच्चे अंबेडकरवादी युवा हैं। आठवले ने गर्व के साथ कहा कि दीपके ने छात्रों के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन खड़ा किया है और वे स्वयं भी ऐसे ही आंदोलनों की उपज हैं।
अभिजीत दीपके द्वारा किए गए 25 दिनों के आंदोलन का जिक्र करते हुए आठवले ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन लंबे समय तक अत्यंत शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक छात्र रेल भवन तक सीमित थे, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, लेकिन जब छात्रों ने बैरिकेड तोड़कर पार्लियामेंट की ओर घुसने का प्रयास किया, तब पुलिस को लाठी चलानी पड़ी। हालांकि, उन्होंने छात्र नेता का पक्ष लेते हुए यह भी कहा, मैं लाठीचार्ज का समर्थन नहीं करता हूं और इसकी जरूर इंक्वायरी होनी चाहिए।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है। आठवले के शब्दों में, नीट को फिट करने के लिए मोदी सरकार ने यह बिल लाया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने छात्रों की मांगों पर ध्यान दिया है और यही कारण है कि छात्र अब खुश हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभिनंदन के गीत गा रहे हैं।
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आठवले ने अपने चिर-परिचित अंदाज में विपक्ष को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे जितने भी आरोप लगाए, सरकार उतनी ही मजबूती से उन्हें पीछे धकेलती रहेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वे स्वयं भी लाठियां खाकर ही यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में ही मराठवाड़ा विश्वविद्यालय को बाबा साहब का नाम दिलाने के लिए 17 साल तक संघर्ष करना पड़ा था।
भाषण के समापन पर आठवले ने अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराते हुए कहा कि 2014 में उनके समर्थन के बिना शायद भाजपा की सरकार नहीं बनती। उन्होंने बड़े आत्मविश्वास के साथ घोषणा की कि 2029 में भी नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे और वे स्वयं उस मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे। अंत में उन्होंने जय भीम, जय भारत के नारे के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया, जिससे सदन में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई।