सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय  सोर्स- सोशल मीडिया
पुणे

पुणे यूनिवर्सिटी में छात्र आंदोलनों पर प्रतिबंध से विवाद, छात्र संगठनों ने उठाए सवाल

Pune University News: एसपीपीयू पुणे में आंदोलनों और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध के परिपत्र पर छात्र संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए रद्द करने की मांग की है।

प्रमोद यादव

Highlights

  • पुणे यूनिवर्सिटी में मोर्चों और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध से विवाद।

  • छात्र संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया।

  • परिपत्र रद्द कर शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए मंच देने की मांग।

Savitribai Phule Pune University: महाराष्ट्र में शैक्षणिक संस्थानों में छात्र चुनाव फिर से शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) परिसर में मोर्चों, आंदोलनों, बैठकों और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

विश्वविद्यालय की प्रबंधन परिषद की ओर से 25 अगस्त 2026 को जारी परिपत्र का विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध किया है। संगठनों का आरोप है कि यह निर्णय छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करता है।

आंबेडकर प्रतिमा के पास प्रदर्शन पर भी सवाल

पुणे शहर के छात्र संगठनों का कहना है कि परिपत्र के तहत विशेष रूप से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास स्थित परिसर में छात्रों को अपनी मांगें रखने और आंदोलन करने से रोका जा रहा है। संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

उनका तर्क है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार सुनिश्चित करता है। छात्र संगठनों के अनुसार, इन अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।

चुनिंदा संगठनों के उल्लेख पर उठे सवाल

विवादित परिपत्र में सीजेपी, सम्यक विद्यार्थी आंदोलन तथा शिव-फुले-शाहू-आंबेडकरी और अन्य प्रगतिशील संगठनों का विशेष रूप से उल्लेख किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्र संगठनों ने प्रशासन से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या प्रतिबंध सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होंगे या कुछ संगठनों को इससे छूट दी जाएगी।

संगठनों का कहना है कि नियमों को लागू करते समय किसी भी संगठन के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से परिपत्र के उद्देश्य और उसके दायरे को स्पष्ट करने की मांग भी की है।

छात्र चुनाव समिति के बीच बढ़ा विवाद

राज्य के उच्च एवं उच्च शिक्षा विभाग ने 24 सितंबर 2026 को शैक्षणिक संस्थानों में छात्र चुनाव दोबारा शुरू करने के विषय पर एक समिति गठित की थी। ऐसे समय में विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलनों पर प्रतिबंध को लेकर उठे सवालों ने छात्र राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज कर दी है।

छात्र संगठनों ने परिपत्र तत्काल रद्द करने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने के लिए लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध कराने की मांग की है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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