पुणे मनपा के भाजपा के 126 नगरसेवक एक साल का मानधन सूखा राहत निधि में देंगे।
प्रस्ताव पर भाजपा और विपक्ष आमने-सामने, सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने पर विवाद।
NCP के नेताओं ने भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
Pune Municipal Corporation: सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए पुणे मनपा के सभी नगरसेवकों का एक साल का मानधन मुख्यमंत्री सूखाग्रस्त सहायता निधि में जमा करने के प्रस्ताव पर शुक्रवार को मनपा की आम सभा में सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। भाजपा नगरसेवक धीरज घाटे और योगेश मुलीक ने यह प्रस्ताव रखा। भाजपा के सभी 126 नगरसेवकों का एक साल का मानदेय देने की घोषणा की गई।
हालांकि, प्रस्ताव से पहले सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाए जाने पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने आपत्ति जताई। इससे किसानों की मदद का मुद्दा राजनीतिक विवाद में बदल गया। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि सूखाग्रस्त किसानों की मदद करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस संबंध में निर्णय सभी दलों को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस ने भाजपा पर सहायता के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। वहीं, भाजपा ने सूखे की गंभीरता का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे समय में मदद के प्रस्ताव का विरोध करना उचित नहीं है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के नगरसेवक गफूर पठाण ने सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में एक साल का मानधन और एक लाख रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवक निवृत्ति बांदल ने एक साल का मानदेय और 1 लाख 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया, इससे विपक्ष में दरार नजर आई।
नगरसेवकों का एक साल का मानदेय भाजपा नगरसेवक धीरज घाटे ने सभी सहायता निधि में जमा करने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष के नेता निलेश निकम ने इस पर उपसूचना दी। राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवकों की ओर से, एक महीने का मानधन देने की बात कही गई।
हालांकि, प्रस्ताव पेश करने से पहले अन्य दलों के साथ चर्चा नहीं किए जाने पर सदन में सवाल उठे। कांग्रेस नगरसेवक अरविंद शिंदे ने कहा कि महापौर मंजुषा नागपुरे ने प्रस्ताव से पहले सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई होती, तो अधिक सकारात्मक और सर्वसम्मत निर्णय लिया जा सकता था। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक नगरसेवक से अलग-अलग सहमति पत्र लिया जाए और सभी को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार सहायता देने का अवसर मिले।
कांग्रेस गुट नेता रामचंद्र उर्फ चंदू सेठ कदम ने आरोप लगाया कि भाजपा सूखाग्रस्त किसानों की मदद के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।
सूखे की गंभीरता को देखते हुए पुणे महापौर को सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों की राय लेनी चाहिए थी। ऐसा किए बिना सीधे एक साल का मानधन देने का प्रस्ताव पेश करना उचित नहीं है। विपक्ष के नेता नीलेश निकम ने भी भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाए। किसानों की मदद के संबंध में प्रत्येक दल की अपनी भूमिका हो सकती है।