रुपाली चाकणकर और रुपाली ठोंबरे पाटील सोर्स- सोशल मीडिया
पुणे

सावित्रीबाई फुले से तुलना पर रुपाली चाकणकर पर भड़कीं रुपाली ठोंबरे पाटील, बोली मेकअप लगाने से नहीं आती अक्ल

Pune NCP Internal Conflict: राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता रुपाली चाकणकर द्वारा खुद की तुलना सावित्रीबाई फुले से करने पर रुपाली ठोंबरे पाटील ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने चाकणकर पर तीखे सवाल उठाए हैं।

वेदांत जोशी

Savitribai Phule Comparison Conflict Pune Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की दो प्रमुख महिला नेताओं, रुपाली चाकणकर और रुपाली ठोंबरे पाटील के बीच आपसी जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर द्वारा खुद की तुलना क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले से किए जाने पर रुपाली ठोंबरे पाटील ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले का नाम लेने से पहले उनके विचारों और महान सामाजिक योगदान को समझना बेहद आवश्यक है।

सावित्री की बेटी बताने पर शुरू हुआ विवाद

पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान रुपाली चाकणकर ने अशोक खरात मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे इन आरोपों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

चाकणकर ने अपने संघर्ष की तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह 200 साल पहले सावित्रीबाई फुले ने भीषण सामाजिक विरोध और लांछनों का सामना किया था, वे भी उसी तरह मुकाबला कर रही हैं। खुद को 'सावित्री की बेटी' बताते हुए उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।

ठोंबरे पाटील ने दागे सवाल, की व्यक्तिगत टिप्पणी

चाकणकर के इस बयान पर पलटवार करते हुए रुपाली ठोंबरे पाटील ने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले का जीवन अंधविश्वास उन्मूलन, महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों के लिए समर्पित था। उन्होंने चाकणकर के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि महिला आयोग की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने महिलाओं के व्यापक हित में क्या ठोस कदम उठाए?

तकरार को आगे बढ़ाते हुए ठोंबरे पाटील ने तीखा हमला बोला और कहा, "लाली-लिपस्टिक लगाने से अक्ल नहीं आती।"

क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के नाम से शुरू हुआ यह विवाद अब दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल चुका है, जिससे पार्टी के भीतर का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

राजनीतिक आरोपों, प्रशासनिक फैसलों और जनहित की योजनाओं के बीच बने इस माहौल का सीधा असर आने वाले समय में न केवल विकास कार्यों की रफ्तार पर, बल्कि राज्य के पूरे सियासी परिदृश्य और आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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