पुणे में बाइक टैक्सी को लेकर बड़ा फैसला (सोर्स: AI)
पुणे

बाइक टैक्सी से रिक्षा चालकों की आय प्रभावित होने का दावा, पुणे में कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Bike Taxi Ban Order In Pune: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में सरकारी अनुमति के बिना बाइक टैक्सी चलाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लंघन पर कार्रवाई होगी और ऐप आधारित रिक्षा किराये की भी जांच होगी।

आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने बिना सरकारी अनुमति बाइक टैक्सी संचालन बंद करने के निर्देश दिए।

  • रिक्षा संगठनों ने बाइक टैक्सी से प्रतिस्पर्धा और चालकों की आय पर असर पड़ने की चिंता जताई।

  • ऐप आधारित रिक्षा के मनमाने किराये पर कार्रवाई के लिए परिवहन अधिकारी को निर्देश दिए गए।

Government Approval On Order: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बिना सरकारी अनुमति संचालित हो रही बाइक टैक्सी सेवाओं को तत्काल बंद करने के निर्देश जिलाधिकारी एवं क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अध्यक्ष जितेंद्र डुडी ने दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाइक टैक्सी संचालन के लिए शासन की विधिवत अनुमति मिलने तक प्रायोगिक अथवा नियमित, किसी भी रूप में यह सेवा नहीं चलाई जा सकती। नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ेगी।

एग्रीगेटर कंपनियों की कथित मनमानी और नियमों के उल्लंघन को लेकर बढ़ती शिकायतों के बाद जिलाधिकारी कार्यालय में गुरुवार को प्रशासन, परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, रिक्षा संगठनों और ओला, उबर व रैपिडो जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक हुई।

पुणे में पहले से वाहनों का दबाव

महाराष्ट्र रिक्षा पंचायत सहित विभिन्न संगठनों ने बाइक टैक्सी सेवा पर रोक लगाने और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। बैठक में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अर्चना गायकवाड, उपप्रादेशिक परिवहन अधिकारी स्वप्निल भोसले, पिंपरी-चिंचवड़ यातायात पुलिस के अधिकारी तथा विभिन्न रिक्षा संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

महाराष्ट्र रिक्षा पंचायत के अध्यक्ष नितीन पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी के इलेक्ट्रिक वाहनों में रूपांतरण के लिए नौ महीने की अवधि देने का निर्णय लिया है। हालांकि, इस संबंध में प्रस्ताव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के समक्ष आने पर भी पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुणे जिले में पहले ही बड़ी संख्या में रिक्षाएं और अन्य वाहन सड़कों पर हैं। ऐसे में नए वाहनों को अनुमति देने से यातायात की समस्या और बढ़ सकती है। बाइक टैक्सी के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का तर्क भी उचित नहीं है, क्योंकि इससे नया रोजगार पैदा होने के बजाय पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे रिक्षा चालकों की आय प्रभावित होगी।

ऐप कंपनियों के मनमाने किराये पर भी लगाम

बैठक में ऐप आधारित रिक्षा सेवाओं के किराये का मुद्दा भी उठाया गया। पवार ने कहा कि रिक्षा का किराया निर्धारित करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के पास है। इसके बावजूद एग्रीगेटर कंपनियां अपने ऐप पर अलग-अलग किराये दिखाती और वसूलती हैं।

इससे यात्रियों में भ्रम पैदा होता है और मीटर के अनुसार किराया देने की व्यवस्था प्रभावित होती है। जिलाधिकारी ने इस मुद्दे पर सहमति जताते हुए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कंपनियों पर मामला दर्ज करने की मांग

महाराष्ट्र रिक्षा पंचायत के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बाबा कांबले ने आरोप लगाया कि ओला और उबर जैसी कंपनियां मुनाफे के लिए रिक्षा-टैक्सी चालकों का आर्थिक शोषण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियां नियमों और प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन करती हैं।

ऐसी कंपनियों के खिलाफ तत्काल मामले दर्ज किए जाने चाहिए। रिक्षा संगठनों ने रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवा को बिना अनुमति संचालित किए जाने का आरोप लगाते हुए इसे बंद करने की मांग की। बैठक में इस सेवा के संचालन के लिए सरकारी अनुमति का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट

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