पुणे गणेशोत्सव शोभायात्रा में ढोल ताशा का प्रदर्शन (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

पुणे DJ फ्री गणेशोत्सव: 4 बेस-4 टॉप की अनुमति के बाद भी 90 डेसिबल के पार पहुंचा शोर, NGT के निर्देशों पर सवाल

Pune Ganeshotsav DJ Sound Ban: पुणे में डीजे और बड़े साउंड सिस्टम के बिना भी गणेशोत्सव के पहले दिन ध्वनि स्तर 90 डेसिबल के पार दर्ज किया गया, जिससे नियमों के पालन पर बहस छिड़ गई है।

वेदांत जोशी

Noise Pollution NGT Directives: पुणे में पारंपरिक शोभायात्राओं और 'मानाचे पंच गणपति' की प्राण प्रतिष्ठा के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत तो हुई, लेकिन शहर में ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। नागरिकों के अभियानों के बाद इस साल शोभायात्राओं में डीजे और बड़े डॉल्बी साउंड सिस्टम नदारद रहे, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में शोर का स्तर 90 डेसिबल (dB) से अधिक रिकॉर्ड किया गया। इस रियलिटी चेक ने प्रशासन के दावों और ध्वनि नियमों के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या कहते हैं ध्वनि प्रदूषण के कानूनी नियम?

Noise Pollution Rules, 2000 के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय एम्बिएंट नॉइज की सीमा 55 dB(A) निर्धारित है। नियमों के तहत लाउडस्पीकर का अधिकतम स्तर 65 dB(A) से ज्यादा नहीं हो सकता। वर्ष 2024 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की पश्चिमी जोन बेंच ने निर्देश दिया था कि विसर्जन मार्गों पर रियल-टाइम नॉइज मॉनिटरिंग डिस्प्ले लगाए जाएं। कानूनी रूप से स्पीकरों की संख्या के बजाय उत्पन्न होने वाला वास्तविक डेसिबल स्तर मायने रखता है, जिसे पुणे पुलिस की 'चार बेस-चार टॉप' की अनुमति प्रणाली भी नियंत्रित करने में विफल दिख रही है।

पारंपरिक ढोल-ताशा बनाम पर्यावरण नियम: बंटी नागरिकों की राय

डीजे बंद होने के बावजूद अत्यधिक शोर दर्ज होने से यह बहस छिड़ गई है कि क्या नियम केवल इलेक्ट्रॉनिक साउंड सिस्टम पर लागू होने चाहिए या पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर भी? सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट का कहना है कि नियम समान रूप से लागू होने चाहिए, चाहे आवाज का स्रोत कुछ भी हो। वहीं दूसरी ओर, गणेशोत्सव देखने आए कई श्रद्धालुओं का मानना है कि ढोल-ताशा पुणे की संस्कृति और उत्सव का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाबंदी लगाना त्योहार की भावना को प्रभावित करेगा।

दही हांडी में 132 एफआईआर, गणेशोत्सव में सख्त निगरानी की मांग

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए दही हांडी उत्सव के दौरान भी पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में ध्वनि नियमों के उल्लंघन पर 132 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थीं और कई जगहों पर डीजे जब्त किए गए थे। गणेशोत्सव के पहले दिन के आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल 'डीजे बैन' कर देना ही काफी नहीं है, बल्कि वास्तविक लक्ष्य निर्धारित डेसिबल सीमाओं का कड़ाई से पालन कराना होना चाहिए।

करोड़ों की संपत्ति फिर भी सड़कों पर भीख मांग रहे BJP विधायक! VIDEO वायरल होने के बाद सामने आई वजह

राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की भारी फजीहत! प्रत्याशी को मिला महज 1 वोट, कांग्रेस के आगे सारी रणनीति फेल

Supreme Court Hindi Service: हिंदी दिवस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा ऐलान, अब आसान हिंदी में समझ सकेंगे फैसले

Disha Salian Case में FIR दर्ज! सिर्फ आदित्य ठाकरे नहीं, बाकी नाम सुनकर भी लगेगा शॉक; एक्शन मोड में CBI

होर्मुज के बाद सऊदी ने भी बंद की तेल की पाइपलाइन, भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?