जनवरी से 20 अक्टूबर 2026 तक पुणे में डेंग्यू के 2,413 मामले सामने आए।
13 हजार घरों के 18,885 पानी के कंटेनरों में एडीज मच्छरों के लार्वा पाए गए।
महानगरपालिका ने 2,664 संपत्तियों को नोटिस जारी कर दंडात्मक कार्रवाई की।
PMC Action On 2413 Child Death: शहर में डेंगू का प्रकोप बढ़ने के बीच लोहेगांव की आठ वर्षीय बच्ची और गोखलेनगर की एक बुजुर्ग महिला की मौत का मामला सामने आया है। बच्ची की मौत डेंग्यू से होने की आशंका जताई गई है।
उसे डेंग्यू शॉक सिंड्रोम के साथ लिवर को गंभीर नुकसान, किडनी फेल होने और कई अंगों के काम करना बंद करने जैसी जटिलताएं हुई थीं। इस बीच, पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) के स्वास्थ्य विभाग के पास डेंग्यू के मरीजों और मौतों का स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने पर स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भीमाले ने प्रशासन को फटकार लगाई है।
उन्होंने अगले स्थायी समिति की बैठक में डेंग्यू से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। लोहेगांव की बच्ची को चार से पांच दिनों से बुखार और पेट दर्द की शिकायत थी। स्थानीय डॉक्टरों से उपचार कराने और सोनोग्राफी के बाद भी उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ।
उसकी आईजीएम, आईजीजी और एनएस-1 तीनों जांच पॉजिटिव आई थीं। शुरुआत में प्लेटलेट्स की संख्या करीब दो लाख थी, लेकिन तबीयत बिगड़ने और सांस लेने में परेशानी होने के बाद 17 अक्टूबर को उसे गंभीर अवस्था में रुबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया।अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रशांत उदावंत के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची का रक्तचाप कम था और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी।
प्लेटलेट्स घटकर लगभग 50 हजार रह गए थे। जांच में फेरिटिन का स्तर बढ़ा हुआ मिला, जिससे शरीर में गंभीर सूजन संबंधी प्रतिक्रिया का संकेत मिला। डॉक्टरों ने डेंग्यू से जुड़ी गंभीर स्थिति हिमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (एचएलएच) की आशंका जताई। बच्ची को डेंग्यू शॉक सिंड्रोम के साथ लिवर को गंभीर नुकसान और किडनी फेल होने जैसी जटिलताएं थीं।
18 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे उसे हृदयाघात हुआ। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। पीएमसी की प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीना बोराडे ने बताया कि अस्पताल की रिपोर्ट में डेंग्यू संक्रमण का उल्लेख है। हालांकि, मौत डेंग्यू के कारण ही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए मृत्यु समीक्षा समिति जांच करेगी। बच्ची को दमा भी था।
बच्ची की मौत के बाद स्थायी समिति की बैठक में डेंग्यू मच्छर के बढ़ते प्रकोप का मुद्दा उठा। अध्यक्ष श्रीनाथ भीमाले ने कहा कि शहर में डेंग्यू के कितने मरीज हैं, कितने गंभीर हैं और कितनी मौतें हुई हैं, इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। सरकारी और निजी अस्पतालों तथा पैथोलॉजी लैब से मरीजों का आंकड़ा नियमित रूप से जुटाया जा रहा है या नहीं, इस पर भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
भीमाले ने कहा कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासन आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। उन्होंने अगले स्थायी समिति की बैठक में डेंग्यू मरीजों, मौतों और नियंत्रण उपायों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। सदस्यों ने मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए धुआं छिड़काव और अन्य उपायों में कथित लापरवाही पर भी नाराजगी जताई। भीमाले के अनुसार, मच्छर नियंत्रण कार्यों के लिए 265 कर्मचारियों की तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की तत्काल बैठक ली। उन्होंने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को डेंग्यू नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए। सरकारी और निजी अस्पतालों तथा दवाखानों से मरीजों की जानकारी जुटाने को भी कहा गया है।
कौर ने बताया कि लोहेगांव की बच्ची की स्थिति और उसकी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में जानकारी ली गई है। गोखलेनगर में एक बुजुर्ग महिला की मौत का मामला भी सामने आया है।
शहर में इस वर्ष डेंग्यू के मरीजों की संख्या दो हजार से अधिक हो चुकी है। पीएमसी का कीट नियंत्रण विभाग मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच कर रहा है। निर्माण स्थलों सहित अन्य जगहों पर लापरवाही मिलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। लोहेगांव में बच्ची के घर के आसपास धुआं छिड़काव कर प्रतिबंधात्मक उपाय किए गए हैं।
प्रशासन ने सर्वेक्षण तेज करने और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की बात कही है। हालांकि, बढ़ते मामलों के बीच मरीजों का समेकित आंकड़ा और नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
शहर में डेंग्यू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। जनवरी से 20 अक्टूबर 2026 तक डेंग्यू के 2,413 मरीज दर्ज किए गए। इनमें अगस्त में 568, सितंबर में 726 और अक्टूबर में 553 मरीज मिले। मच्छरों की उत्पत्ति रोकने के लिए पुणे महानगरपालिका ने करीब 14 लाख घरों का निरीक्षण किया, तथा 28.31 लाख पानी के कंटेनरों की जांच की।
इस दौरान 13 हजार घरों के 18,885 कंटेनरों में एडीज मच्छरों के लार्वा मिले। कार्रवाई करते हुए 2,664 संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए और 6।30 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।