Virar Alibaug Multimodal Corridor News: राज्य सरकार की तरफ से महत्वाकांक्षी विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर के पहले 96।41 किलोमीटर लंबे चरण को मंजूरी दिए जाने के बाद अब इस परियोजना के सामने पर्यावरणीय स्वीकृतियां अगली बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं।
परियोजना के कारण 75 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 5,043 मैंग्रोव वृक्ष प्रभावित होंगे, हालांकि अधिकारियों का दावा है कि इनमें से केवल 449 पेड़ों का स्थायी रूप से नुकसान होगा, जबकि बाकी पेड़ निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षित रहेंगे या उन्हें पुनः रोपित किया जाएगा।
महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। अब एमएसआरडीसी को एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी और नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की मंजूरी का इंतजार है। इसके बाद मैंग्रोव कटाई के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट से भी अनुमति प्राप्त करनी होगी।
अधिकारियों ने बताया कि स्थायी रूप से प्रभावित प्रत्येक पेड़ के बदले तीन गुना संख्या में प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया जाएगा। महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमएसआरडीसी) मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई को जोड़ने वाली इस रिंग रोड परियोजना के लिए जून से निविदाएं (टेंडर) जारी करने की तैयारी भी कर रहा है।
यह कॉरिडोर पूरी तरह निजी निवेश के माध्यम से बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बोट) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, यह परियोजना संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क), तुंगारेश्वर वन्यजीव अभयारण्य और कर्नाला वन्यजीव अभयारण्य जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इन्हीं पर्यावरणीय चिंताओं के कारण पूर्व में इस कॉरिडोर परियोजना में देरी हुई थी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्तुत नवीनतम प्रस्ताव के अनुसार, परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में 5,043 मैग्रोव वृक्ष आते हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों से गुजरने वाले हिस्सों को एलिवेटेड बनाया जाएगा, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे। पर्यावरणीय आपत्तियों के बाद परियोजना के मार्ग (अलाइनमेंट) में पहले ही बदलाव किया जा चुका है।
परियोजना का पहला चरण वसई तालुका के नवघर से उरण तालुका के चिरनेर तक बनाया जाएगा, इसकी अनुमानित लागत 31,793।47 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य वसई-विरार तथा नवी मुंबई के बीच संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
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यह कॉरिडोर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जिसमें डेवलपर 40 वर्षों तक प्रस्तावित्त 8 रुपये प्रति किलोमीटर टोल वसूलकर अपना निवेश वापस प्राप्त करेंगे, परियोजना के दूसरे चरण में इस कॉरिडोर को अलीबाग तक विस्तारित किया जाएगा।