प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
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Nashik: येवला में शिवसेना (यूबीटी) को तगड़ा झटका, संभाजी व मारुति पवार राकां में शामिल

Nashik News: येवला में शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है। संभाजी पवार और पूर्व विधायक मारुति पवार सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ राकां (अजीत गुट) में शामिल हुए।

अपूर्वा नायक

Maharashtra Local Body Election: ऐन स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव से पहले येवला में शिवसेना (यूबीटी) पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है।

शिवसेना के सह-संपर्क प्रमुख संभाजी पवार, जिन्होंने मंत्री छगन भुजबल के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ा था, अब अपने चाचा और पूर्व विधायक मारुति पवार के साथ राकांपा (अजित गुट) में शामिल हो गए।

राज्य में शिवसेना (यूबीटी) पार्टी को छोड़ने वालों का सिलसिला जारी है। अब येवला में उबाठा को यह बड़ा आघात लगा है। पूर्व विधायक मारोतराव पवार और शिवसेना के सह-संपर्क प्रमुख संभाजी पवार (चाचा-भतीजे) ने ठाकरे का साथ छोड़ दिया है।

मंत्री छगन भुजबल के निर्देश पर, उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की उपस्थिति में मुंबई में इन दोनों नेताओं ने पार्टी प्रवेश किया है। सैकड़ों कार्यकर्ताओं का एक जत्था लेकर संभाजी पवार के समर्थक मुंबई के लिए रवाना हुए थे। संभाजी पवार के साथ जो प्रमुख पदाधिकारी गए थे, वे भी राकांपा में शामिल हो गए।

राकां में शामिल होने वालों में पूर्व विधायक मारोतराव पवार, युवा सेना के पूर्व उप-जिला प्रमुख बापू गायकवाड़, पंचायत समिति के पूर्व सभापति प्रवीण गायकवाड़, कृषि उपज बाजार समिति के पूर्व सभापति अरुण काले, वर्तमान निदेशक कांतिलाल साळवे, सखरीद-बिक्री संघ के पूर्व चेयरमैन दिलीपराव मेंगाळ, पंचायत समिति के पूर्व सभापति विठ्ठलराव आठशेरे, कृषि उपज बाजार समिति के पूर्व निदेशक दीपक जगताप के नाम शामिल हैं।

राकां (अजीत) को होगा फायदा

इनके अलावा, तहसील की प्रमुख ग्राम पंचायतों के सरपंच विभिन्न कार्यकारी सोसायटी के चेयरमैन और किसान प्रतिनिधि भी महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की उपस्थिति में पार्टी में शामिल होंगे। इस दल-बदल से रोवला में शिवसेना (यूबीटी) पार्टी को भारी नुकसान होगा और साथ ही येवला के राजनीतिक समीकरणी पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक और जहां येथला नगर परिषद में छगन भुजबल को सत्ता से दूर रखने की कोशिशें चल रही थी, वहीं ठाकरे के इन प्रमुख नेताओं के पार्टी छोड़ने से सीधा फायदा अजित पवार की राकां को और अप्रत्यक्ष रूप से छगन भुजबल को होगा।

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