Nashik Student Enrollment Scam(फोटो क्रेडिट-X)  
नासिक

घोटाला: नासिक के 1152 स्कूलों में जांच पूरी, फर्जी उपस्थिति दिखाने के लिए पूर्व छात्रों का लिया सहारा

Maharashtra Education Fraud: नासिक के स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए पूर्व छात्रों को बुलाया गया। शिक्षा विभाग के विशेष अभियान में बड़ी धांधली।

अनिल सिंह

Nashik Student Enrollment Scam: महाराष्ट्र राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में छात्रों की वास्तविक संख्या जांचने के लिए शुरू किया गया 'विशेष जांच अभियान' (PAT) विवादों में घिर गया है।

नासिक जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने सरकारी अनुदान बचाने के लिए छात्र संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का अनूठा और अवैध रास्ता निकाला है।

पुराने छात्रों के भरोसे 'संख्या बल' का खेल

नासिक जिले के 1152 स्कूलों में पहले चरण की गणना पूरी हो चुकी है, लेकिन इस दौरान भारी अनियमितता की खबरें हैं। आरोप है कि स्कूलों ने निरीक्षण के दिन कक्षाओं को भरा हुआ दिखाने के लिए उन पूर्व छात्रों को वापस बुला लिया, जो स्कूल छोड़ चुके हैं। इन छात्रों को वर्तमान छात्रों के बीच बैठा दिया गया ताकि अधिकारियों की गिनती में संख्या पूरी नजर आए। शिक्षा विभाग के अनुसार, नासिक में निजी, सरकारी सहायता प्राप्त और जिला परिषद स्कूलों के कुल 5,557 छात्रों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाना है।

जांच अधिकारियों को ऐसे दिया झांसा

निरीक्षण के लिए तैनात टीमों, जिनमें पंचायत समिति पर्यवेक्षक, विस्तार अधिकारी और आहार व्याख्याता शामिल थे, ने केवल छात्रों की गिनती की। स्कूलों ने छात्रों को पहले ही सतर्क कर दिया था, जिससे अधिकारियों को किसी भी प्रकार का संदेह नहीं हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि छात्र पोर्टल पर प्रधानाध्यापक के लॉगिन का उपयोग करके उपस्थित छात्रों के नाम के आगे अंक तो अंकित किए गए, लेकिन वास्तविक पहचान की पुष्टि नहीं की गई।

फोटो अपलोडिंग और पोर्टल का बहाना

शिक्षा विभाग के सख्त निर्देश थे कि प्रत्येक कक्षा में उपस्थित विद्यार्थियों की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। हालांकि, तकनीकी खामियों और पोर्टल के बार-बार हैंग होने का बहाना बनाकर इस प्रक्रिया को टाल दिया गया। इसी का फायदा उठाते हुए स्कूल प्रबंधन ने फर्जी नामांकन को सही साबित करने का 'गोलमाल' किया। चर्चा है कि यह सब केवल शिक्षकों और प्रबंधन के आपसी तालमेल से संभव हुआ है ताकि स्कूलों को मिलने वाला सरकारी पोषण आहार और अन्य वित्तीय लाभ बना रहे।

दूसरे चरण की जांच आज से शुरू हो गई है जो 22 अप्रैल तक चलेगी। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इन गंभीर आरोपों के बाद दूसरे चरण में पहचान पत्र और आधार कार्ड के जरिए सख्त सत्यापन सुनिश्चित करता है या नहीं।

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