संजय सोनवणे को सड़क सुरक्षा (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक के संजय सोनवणे को सड़क सुरक्षा शोध के लिए मिलेगी मानद डॉक्टरेट; कुंभ मेला 2027 के लिए बनाई विशेष योजना

Nashik Road safety: इंडो रोड सेफ्टी के अध्यक्ष संजय सोनवणे को सड़क सुरक्षा पर उनके शोध के लिए मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया जाएगा। उनकी संस्था कुंभ मेला 2027 में विशेष अभियान चलाएगी।

रूपम सिंह

Nashik Sanjay Sonawane Road safety: इंडो रोड सेफ्टी के अध्यक्ष संजय सोनवणे को उनके शोध प्रबंध 'भारत में सड़क सुरक्षाः समय की मांग' के लिए यूरोपियन प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया जाएगा। यह नासिक और संपूर्ण देश के लिए गौरव का विषय है, जो सड़क सुरक्षा के प्रति उनके एक दशक के समर्पण और अथक प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान करता है। भारत में सड़क हादसों की स्थिति को देखते हुए संजय सोनवणे का यह शोध कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पिछले एक दशक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर तीन मिनट में एक सड़क हादसा हो रहा है, जिसमें पिछले दस वर्षों में 13 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इन आंकड़ों को कम करने के लिए सोनवणे ने बीते 10 वर्षों में जमीनी स्तर पर व्यापक जनजागरण कार्यक्रम चलाए हैं। अब तक 6000 से अधिक छात्रों और वाहन चालकों को सुरक्षा के गुर सिखाए हैं। उनके इस सराहनीय कार्य की सराहना देश के सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा की गई है।

शोध में मिला सहयोग

इस शोध प्रबंध को मुकाम तक पहुँचाने में कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है- पूर्व परिवहन अधिकारी वासुदेव भगत ने शोध को तकनीकी मजबूती प्रदान की। बेदमुथा इंडस्ट्रीज और विजय बेदमुथा ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। राजाराम सांगले, मंदार वाईकर और शीतल ठाकरे जैसे निदेशकों का इस यात्रा में विशेष सहयोग रहा है।

आगामी कुंभ मेला 2027 के लिए विशेष कार्ययोजना

संस्था की सचिव शीतल ठाकरे ने जानकारी दी कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 को देखते हुए नासिक में एक वृहद सड़क सुरक्षा अभियान बलाया जाएगा। इसके तहत राज्य के विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर 'समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

सड़क सुरक्षा को लेकर नागरिकों को जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यशालाएं और विशेष अभियान संचालित किए जाएंगे। संजय सोनवणे को मिलने वाली यह अंतरराष्ट्रीय उपाधि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति समाज में एक नई चेतना और जिम्मेदारी की भावना भी जागृत करती है,

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