त्र्यंबकेश्वर मंदिर (फोटो नवभारत)
नासिक

Nashik Simhastha Kumbh: त्र्यंबकेश्वर में अखाड़ों पर 80 करोड़ रुपये खर्च होंगे, लोकल मजदूरों को मिलेगा रोजगार

Nashik Simhastha Kumbh Construction Budget: सिंहस्थ कुंभ की तैयारी में अखाड़ों और संतों के आश्रमों के निर्माण पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान हैं, जिससे स्थानीय मजदूरों को काम मिल सकता है।

रामबाबू चौबे, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • त्र्यंबकेश्वर कुंभ की तैयारियां तेज, 31 अक्टूबर को धर्म ध्वजारोहण।

  • अखाड़ों और संतों के आश्रमों के निर्माण के लिए करीब 80 करोड़ रुपये का अनुमान।

  • निर्माण कार्यों से स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलने की उम्मीद।

Trimbakeshwar Akhara Construction Budget: त्र्यंबकेश्वर में धर्म ध्वजा स्तंभ स्थापित होने के बाद कुंभ की उल्टी गिनती शुरू हो गई है 31 अक्टूबर को धर्म ध्वजारोहण के साथ ही सिंहस्थ कुंभ का आगाज भी हो जाएगा।

इसी दौरान कुंभ की तैयारी को लेकर महाराष्ट्र सरकार के द्वारा अखाड़े में निर्माण कार्य की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यहां पर यह बता दिया जाए की महाराष्ट्र सरकार ने पहले 5 करोड़ बाद में 2 करोड़ और कुल मिलाकर प्रतीक अखाड़े पर 7 करोड रुपए देश भर से आने वाले साधु संतों तीर्थ यात्रियों के रहने और सुविधाओं पर खर्च करने का दावा किया था।

त्र्यंबकेश्वर में 10 अखाड़े हैं

त्र्यंबकेश्वर में कुल 10 अखाड़े हैं जिनमें से प्रमुख रूप से जूना आवाहन अग्नि निरंजन आनंद महानिर्वाणी और अटल के साथ बड़ा उदासीन नया उदासीन और निर्मल अखाड़े की छावनियां त्र्यंबकेश्वर में ही मौजूद है।

इन 10 अखाड़े पर खर्च होने वाली राशि कुल मिला दी जाए तो लगभग 70 करोड़ के पास पहुंचती है इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार 70 से 80 संत जो अखाड़े से अलग हटकर अपना आश्रम चल रहे हैं उन पर प्रतीक आश्रमधारी पर 15 लाख का बजट निर्धारित किया है।

अभी इनकी संख्या चिन्हित नहीं हुई है लेकिन एक अनुमान है कि 70 से 75 ऐसे संत हो सकते हैं जिनको सरकार 15-15 लाख निर्माण कार्य के लिए देगी। इस तरह से कुल मिला लिया जाए तो यह कहा जा सकता है कि त्र्यंबकेश्वर में अखाड़े को सुविधा के नाम पर निर्माण कार्य में सरकार के द्वारा 80 करोड रुपए खर्च होगा।

अखाड़े को पैसा नहीं आवश्यकता अनुसार सुविधा पर खर्च

यहां पर यह भी स्पष्ट कर दिया जाए की किसी भी अखाड़े के खाते में या अखाड़े को सरकार कोई भी भुगतान या पैसा नहीं देती और यही फॉर्मूला आश्रम धारी पर भी लागू होता है सरकार यह व्यवस्था उनके आश्रम के अंदर या कहीं पर उनके नाम पर खाली पड़ी जमीन में रहने के लिए कमरा सत्संग हॉल, लैट्रिन बाथरूम या सुविधाजनक परिवहन के लिए उनके आश्रम के अंदर सड़क टाइल्स पेयजल प्रबंधन के लिए निर्माण एजेंसियों के द्वारा कार्य करवा कर देती है।

सूखा प्रभावित मजदूरों के लिए वरदान बनेगा कुंभ?

यहां पर यह बता दिया जाए कि नासिक जिले का त्र्यंबकेश्वर एक ऐसा तहसील है जहां पर 80% जनता ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और यहां पर मुख्य धंधा खेतों में मजदूरी ही है। ऐसे में जब इस समय सुखा होने के कारण खेतों में मजदूरी करके पेट पालने वाले मजदूर और किसानों के सामने संकट की घड़ी है तो उसे समय यह कुंभ उनके लिए वरदान साबित होने वाला है।

क्योंकि अखाड़े और साधु संतों को मिलने वाला लगभग 80 करोड रुपए केवल निर्माण कार्य में ही खर्च होगा। जिसका मतलब सीधा सा यह भी है कि लगभग कोई भी निर्माण कार्य बिना मजदूरों के पूरा नहीं होता क्योंकि यहां पर सभी निर्माण कार्य एक साथ शुरू होने वाले हैं और सब एक साथ ही खत्म होंगे इसलिए यहां के ठेकेदारों को ज्यादा मजदूरों की आवश्यकता पड़ेगी।

वैसे भी बड़ी-बड़ी निर्माण एजेंसी या बताती है कि मकान या घरों की कुल लागत का 25 से 30% मजदूरी पर खर्च होता है और इस तरह से अगर यह कहा जाए कि सिंहस्थ कुंभ में अखाड़े पर खर्च होने वाले 80 करोड़ में से 25 से 30 करोड़ स्थानीय मजदूरों को मिलेगा तो गलत नहीं है।

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