नासिक AQI 152 पॉल्यूशन स्पाइक सोर्स: सोशल मीडिया
नासिक

दिल्ली से भी ज्यादा रहा नासिक का AQI, 11 दिनों में 83 से बढ़कर 152 पहुंचा, कुंभ के निर्माण कार्यों से चिंता

Nashik AQI 152 Pollution Spike: नासिक में 15 अक्टूबर को AQI 152 दर्ज हुआ। सड़क खुदाई, निर्माण कार्य और ट्रैफिक जाम से धूल-धुएं का खतरा बढ़ने की आशंका, संवेदनशील लोगों को सतर्क रहने की सलाह।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • 15 अक्टूबर को नासिक का AQI 152 दर्ज होने का दावा।

  • 4 अक्टूबर के 83 से बढ़कर 15 अक्टूबर को 152 हुआ AQI।

  • सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच निर्माण और सड़क खुदाई से धूल बढ़ने की आशंका।

  • PM2.5 सूक्ष्म कणों के स्तर में वृद्धि की जानकारी सामने आई।

  • बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को सतर्क रहने की सलाह।

Nashik AQI Air Pollution Simhastha Kumbh Construction: नासिक में 15 अक्टूबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 152 दर्ज किया गया, जो उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। सड़क खुदाई, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और ट्रैफिक जाम को प्रदूषण बढ़ने की संभावित वजह माना जा रहा है। AQI मध्यम श्रेणी में होने के बावजूद संवेदनशील लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

11 दिनों में 83 से 152 पर पहुंचा AQI

कुंभ के कामों के बीच बढ़ा वायु प्रदूषण

नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच नासिक में वायु प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिले हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 15 अक्टूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 152 दर्ज किया गया। यह अक्टूबर में अब तक का सबसे अधिक स्तर बताया गया है। इसी दिन दिल्ली का AQI 119 दर्ज होने का दावा किया गया, हालांकि अलग-अलग शहरों के आंकड़ों की तुलना करते समय निगरानी केंद्र और मापन का समय समान होना जरूरी है।

नासिक शहर में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों की खुदाई, यातायात जाम और वाहनों से निकलने वाले धुएं को प्रदूषण बढ़ने की संभावित वजह माना जा रहा है। निगरानी केंद्रों पर PM2.5 सूक्ष्म कणों का स्तर बढ़ने की जानकारी भी सामने आई है।

11 दिनों में 83 से 152 पर पहुंचा AQI

इन आंकड़ों के मुताबिक, 11 दिनों में AQI 83 से बढ़कर 152 हो गया। यह हवा की गुणवत्ता में गिरावट का संकेत है। हालांकि, प्रदूषण के कारणों की पुष्टि के लिए स्थानीय निगरानी केंद्रों के विस्तृत आंकड़ों और संबंधित विभागों की रिपोर्ट का विश्लेषण जरूरी है।

किन इलाकों में धूल और जाम की समस्या?

द्वारका, कॉलेज रोड, गंगापुर रोड, इंदिरानगर, रविवार कारंजा और पंचवटी जैसे क्षेत्रों में यातायात जाम की समस्या सामने आती रहती है। सिंहस्थ कुंभ समेत विभिन्न विकास कार्यों के लिए सड़कों की खुदाई और निर्माण गतिविधियों से धूल उड़ने की आशंका है। जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं भी स्थानीय वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रित करने के लिए उचित ढंकाव, नियमित पानी का छिड़काव और आसपास की सड़कों की सफाई जरूरी है। खुदाई के बाद सड़कों की मरम्मत और मलबे का समय पर निस्तारण भी महत्वपूर्ण है।

दिल्ली से भी ज्यादा रहा नासिक का AQI

AQI 152 का स्वास्थ्य पर क्या असर?

भारत में AQI के 101 से 200 के बीच रहने पर हवा को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए 152 का स्तर खराब श्रेणी में नहीं आता, लेकिन संवेदनशील लोगों को इससे परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को धूल-धुएं के संपर्क से बचने की सलाह दी जाती है।

डॉ. गौरी कुलकर्णी के अनुसार, प्रदूषण के संपर्क में आने से सर्दी, खांसी और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने बाहर निकलते समय उपयुक्त मास्क इस्तेमाल करने और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तथा खुदाई स्थलों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल के उपप्रादेशिक अधिकारी प्रणव पाखले के अनुसार, हवा की गुणवत्ता में समय-समय पर उतार-चढ़ाव होता है। बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण और खुदाई के कार्यों से धूलकण बढ़ने तथा वायु गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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