महाराष्ट्र के न्यायालयीन कर्मचारियों ने 2026 की दिवाली नहीं मनाने का संकल्प लिया।
17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 30 जनवरी 2025 को संशोधित वेतनमान का प्रस्ताव सरकार को भेजा था।
5 नवंबर से नाशिक में आमरण अनशन की तैयारी।
6 और 7 नवंबर को अन्नत्याग आंदोलन तथा वसुबारस पर सामूहिक अवकाश का ऐलान।
Nashik Bombay High Court Pay Scale Proposal Maharashtra government: महाराष्ट्र के न्यायालयीन कर्मचारियों ने समान काम, समान वेतन के सिद्धांत के तहत संशोधित वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। कर्मचारियों ने 2026 की दिवाली नहीं मनाने और मांगें पूरी नहीं होने पर 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। संगठनों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी देने की मांग की है।
समान काम, समान वेतन के सिद्धांत के तहत संशोधित वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के न्यायालयीन कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का रुख अपनाया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांग पर निर्णय नहीं होने के कारण उनमें असंतोष बढ़ रहा है। इसी के विरोध में उन्होंने वर्ष 2026 की दिवाली नहीं मनाने का संकल्प लिया है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 30 जनवरी 2025 को संशोधित वेतनमान का प्रस्ताव मंजूर कर राज्य सरकार के पास भेजा था। लगभग 20 महीने बीत जाने के बावजूद प्रस्ताव पर निर्णय नहीं होने से कर्मचारी नाराज हैं।
इसी के विरोध में 16 और 17 अक्टूबर को राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। वरिष्ठ सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भी आंदोलन में भाग लिया और 17 अक्टूबर को धरना प्रदर्शन किया।
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 5 नवंबर से नासिकमें आमरण अनशन और विभिन्न जिलों में क्रमिक अनशन शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद 6 और 7 नवंबर को अन्नत्याग आंदोलन किया जाएगा।
वसुबारस के दिन कार्यरत कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लेकर कामकाज बंद रखने की भी घोषणा की गई है। हालांकि, इस चरणबद्ध आंदोलन की तारीखों और कार्यक्रमों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि आंदोलन के दौरान वादकारियों, वकीलों और आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लंबित प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी देकर न्यायालयीन कर्मचारियों को राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार ने सकारात्मक निर्णय लिया तो कर्मचारियों की दिवाली खुशियों के साथ बीत सकेगी, अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस आंदोलन में नासिकजिला न्यायालयीन कर्मचारी संगठन के उपाध्यक्ष ए.आर. पवार, सहायक अधीक्षक के.एस. बेदडे, एस.एस. पडोरे, एन.ए. पाटिल, पी.ए. जाधव, जी.आर. शेलके, एन.डी. सोनवणे, आर.एस. भोले और आर.एस. बेदुले सहित अन्य कर्मचारी शामिल हुए।