इगतपुरी में धान की फसल को नुकसान होने का दावा।
शिवसेना (UBT) ने तहसील कार्यालय पर निकाला मोर्चा।
₹5,000 की सहायता को नाकाफी बताते हुए उचित मुआवजे की मांग।
फसल बीमा भुगतान में देरी दूर करने और कर्जमाफी की मांग।
भावली बांध का पानी तहसील से बाहर नहीं भेजने की मांग भी उठाई गई।
Nashik Igatpuri Farmer Protest Crop Loss 2026: नासिक ज़िले के इगतपुरी तहसील में अनियमित मानसूनी बारिश से धान की फसल को नुकसान होने का दावा करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने तहसील कार्यालय पर मोर्चा निकाला। प्रदर्शनकारियों ने 5,000 की सहायता को नाकाफी बताते हुए उचित मुआवजा, फसल बीमा का जल्द भुगतान और कर्जमाफी की मांग की। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई।
नासिक ज़िले के इगतपुरी तहसील में इस वर्ष मानसूनी बारिश की अनियमितता के कारण धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचने का दावा करते हुए शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने तहसील कार्यालय पर मोर्चा निकाला। जिला प्रमुख निवृत्ति जाधव, उपजिला प्रमुख कुलदीप चौधरी और तहसील प्रमुख राजाभाऊ नाठे के नेतृत्व में निकाले गए इस मोर्चे के दौरान तहसीलदार अभिजीत बारवकर को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित किसानों को तत्काल राहत देने और फसल नुकसान की भरपाई के लिए जल्द निर्णय लेने की मांग की। उनका कहना था कि फसल बर्बादी के कारण किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और मौजूदा सहायता उनकी जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि किसानों को केवल 5,000 की सहायता देना पर्याप्त नहीं है। फसल खराब होने से प्रभावित परिवारों को उनकी वास्तविक क्षति के अनुरूप मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने दीपावली से पहले किसानों को राहत उपलब्ध कराने के लिए सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
मोर्चे के दौरान किसानों के समर्थन में नारेबाजी भी की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से करना चाहिए, ताकि उन्हें कर्ज और खेती के खर्च का बोझ उठाने में राहत मिल सके।
प्रदर्शनकारियों ने फसल बीमा का प्रीमियम भरने के बावजूद मुआवजा मिलने में कथित देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि बीमा दावों का निपटारा अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और नुकसानग्रस्त किसानों को नियमानुसार जल्द भुगतान किया जाए।
इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने सरसकट कर्जमाफी और फसल नुकसान के उचित मुआवजे की मांग की। उनका कहना था कि किसानों पर जटिल शर्तें थोपने के बजाय राहत प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए।
मोर्चे में भावली बांध के पानी का मुद्दा भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बांध का पानी तहसील से बाहर न भेजा जाए। उनके अनुसार, पानी स्थानीय नागरिकों की पेयजल जरूरतों और पशुओं के लिए उपलब्ध रखा जाना चाहिए।
नेताओं ने चेतावनी दी कि फसल बर्बादी, कर्ज के बोझ और पानी की समस्या पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
मोर्चे में कावजी ठाकरे, नंदलाल भागडे, विठ्ठल लंगडे, देवराम म्हसणे, अंबादास धौगडे, नगरसेवक भूषण जाधव और उपशहर प्रमुख संदीप शर्मा सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक और प्रभावित किसान उपस्थित थे।