आदि शंकाराचार्य सोर्स: सोशल मीडिया
नासिक

सनातन धर्म की मुगलों से रक्षा के लिए आदि शंकराचार्य ने शुरू की थी अखाड़ा परंपरा, देखें 13 अखाड़ों की सूची

Akhara History: मुगलकाल में सनातन धर्म और मंदिरों की रक्षा के लिए आदि शंकराचार्य ने अखाड़ा परंपरा की शुरुआत की थी। जानिए देश के 13 प्रमुख अखाड़ों का इतिहास और उनके नाम।

रामबाबू चौबे, आकाश मसने

Highlights

  • मुगलकाल में सनातन धर्म और मंदिरों की रक्षा के लिए अखाड़ा परंपरा की शुरुआत की थी।

  • अखाड़ा परंपरा की शुरुआत आदि शंकराचार्य ने की थी।

  • प्राचीनकाल में अखाड़ों के साधु-संत अस्त्र-शस्त्र विद्या और युद्ध कौशल का अभ्यास करते थे।

  • देश में कुल 13 मान्यता प्राप्त अखाड़े हैं जो शिव संन्यासी, बैरागी वैष्णव और उदासीन संप्रदायों में बंटे हुए हैं।

13 Akharas List: जब-जब देश और सनातन संस्कृति पर संकट आया, तब-तब संतों ने आगे बढ़कर राष्ट्र और धर्म की रक्षा की। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि जब मुगल साम्राज्य के दौरान लगातार सनातन संस्कृति पर हमले किए जा रहे थे और हिंदू मठ-मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, तब धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ा परंपरा की नींव पड़ी थी। आदि शंकराचार्य द्वारा शुरू की गई इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य मुगल शासन से मुकाबला करना और हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति देकर धर्म की रक्षा करना था।

अखाड़ा प्राचीनकाल में भारत के साधु-संतों का एक ऐसा समूह होता था जो संकट के समय में राजधर्म के विरुद्ध परिस्थितयों में राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा के लिए कार्य करता था। इस प्रकार के संकट से राष्ट्र और धर्म दोनों की रक्षा के लिए अखाड़े के साधु अपनी अस्त्र विद्या का उपयोग भी किया करते थे। इसीलिए अखाड़े के अन्तर्गत पहलवानों के लिए एक मैदान होता था जिसमें सभी अखाड़े के सदस्य शरीर को सुदृढ़ रखने और संकट के समय में सुरक्षा की दृष्टि से खुद को एक से बढ़कर एक दांव-पेच का अभ्यास किया करते थे। साथ ही शस्त्र विद्या भी सीखते थे।

आज भी प्रासंगिक हैं अखाड़े

वर्तमान समय में अखाड़े आज भी मौजूद है जो विभिन्न धर्म पंथ संप्रदाय में बंटे हुए हैं। अखाड़े आज भी राष्ट्र को संकट में आने पर ज्ञान आदि से लोगों को सही राह पर लाने के लिए तत्पर रहते हैं। अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के 'मठ' कहे जा सकते हैं।

कुंभ मेले के दौरान अखाड़ों को महत्व

वर्तमान में देश में कुल 13 प्रमुख मान्यता प्राप्त अखाड़े हैं। अखाड़े अपनी-अपनी परंपराओं में शिष्यों को दीक्षित करते हैं और उन्हें उपाधि देते हैं। भारत के सबसे विशाल धार्मिक समागम यानी कुंभ मेले में इन सभी अखाड़ों की भूमिका सबसे अहम होती है। कुंभ के दौरान ये अखाड़े पूरी तन्मयता से शामिल होते हैं और सबसे पहले 'शाही स्नान' करते हैं। इन अखाड़ों का एक अध्यक्ष होता जिसका चुनाव एक जटिल प्रक्रिया के अधीन होता है।

कुंभ से अखाड़ों का नाता

महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर-नासिक में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ में इन अखाड़ों का प्रभाव और ऐतिहासिक जुड़ाव बहुत गहरा है। नासिक के त्र्यंबकेश्वर स्थित 'श्री तपोनिधि आनन्द अखाड़ा पंचायती' शिव संन्यासी संप्रदाय के प्रमुख अखाड़ों में शामिल है।

आगामी नासिक सिंहस्थ कुंभ के दौरान इन अखाड़ों की पेशवाई और भव्य छावनियां आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी। कुंभ पर्व पर साधु-संतों का यह समूह नासिक की पावन भूमि पर धर्म और संस्कृति का अनूठा संदेश प्रसारित करता है। इन सभी 13 अखाड़ों का एक प्रमुख अध्यक्ष होता है, जिसका चुनाव एक बेहद अनुशासित और जटिल प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

देश के मान्यता प्राप्त 13 प्रमुख अखाड़े

देश में मान्यता प्राप्त 13 अखाड़ों में से 7 शिव संन्यासी सम्प्रदाय, 3 बैरागी वैष्णव सम्प्रदाय और 4 उदासीन संप्रदाय के अखाड़े है।

शिव संन्यासी सम्प्रदाय के 7 अखाड़े

  • श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी- दारागंज प्रयाग (उत्तर प्रदेश)

  • श्री पंच अटल अखाड़ा- चैक हनुमान, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

  • श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी- दारागंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)

  • श्री तपोनिधि आनन्द अखाड़ा पंचायती- त्रम्केश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)

  • श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा- बाबा हनुमान घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

  • श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़ा- दशस्मेव घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

  • श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा- गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़ (गुजरात)

बैरागी वैष्णव सम्प्रदाय के 3 अखाड़े

  • श्री दिगम्बर अनी अखाड़ा- शामलाजी खाकचौक मन्दिर, सांभर कांथा (गुजरात)

  • श्री निर्वानी आनी अखाड़ा- हनुमान गादी, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

  • श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा- धीर समीर मन्दिर बंसीवट, वृन्दावन, मथुरा (उत्तर प्रदेश)

उदासीन संप्रदाय के 4 अखाड़े

  • श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा- कृष्णनगर, कीटगंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)

  • श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

  • श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

राजनीतिक खेल के कारण न छीनी जाए आजादी, सौरव दास-आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का मामला पहुंचा हाई कोर्ट

भारत में प्रदर्शन, OTT प्लेटफॉर्म्स और विदेशी ताकतें, RSS प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण की 10 बड़ी बातें

पश्चिम से चली आसुरी आंधी, भारत को तोड़ने का प्लान! विजयादशमी पर मोहन भागवत ने देश और आंदोलनकारियों को किया आगाह

RSS शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव 2026: नागपुर में मोहन भागवत ने किया शस्त्र पूजन

आसमान में बड़ा हादसा टला! एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित