नासिक में खुले खाद्य तेल पर FDA की सख्ती फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
नासिक

रोज का तेल खरीदने वाले की बढ़ी मुसीबत! खुले खाद्य तेल व पुराने टिन बैन पर FDA की कार्रवाई से भड़के कारोबारी

Nashik Oil Traders: नासिक में खुले खाद्य तेल की बिक्री और पुराने टिन के इस्तेमाल पर FDA की कार्रवाई से व्यापारी नाराज हैं। अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ ने प्रतिबंधों का विरोध किया है।

अंकिता पटेल

Nashik Edible Oil Restrictions: नासिक खाद्य तेल की खरीदारी करने वाले हर ग्राहक की जरूरत और जेब एक जैसी नहीं होती। कोई परिवार महीने भर का तेल एक साथ खरीदता है तो कोई रोज की कमाई के हिसाब से 10, 20 या 30 रुपये का तेल लेकर घर चलाता है।

ऐसे में महाराष्ट्र के अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा खुले खाद्य तेल की बिक्री पर की जा रही कार्रवाई ने खाद्य तेल व्यापारियों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। खुले खाद्य तेल की बिक्री के साथ खाद्य तेल के लिए पुराने टिन के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंधों का अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ ने तीखा विरोध किया है।

'गलती कुछ की, कार्रवाई सब पर क्यों?'

महासंघ का कहना है कि नियमों का उद्देश्य यदि मिलावट और अस्वच्छता रोकना है तो कार्रवाई दोषी व्यापारियों के खिलाफ होनी चाहिए, न कि उन सभी कारोबारियों के खिलाफ जो निर्धारित मानकों का पालन करते हैं। महासंघ ने एफडीए की कार्रवाई को लेकर तुकाराम मुंढे की नीति पर भी सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा जरूरी है, लेकिन नियम ऐसे होने चाहिए जिन्हें छोटे व्यापारी और आम उपभोक्ता भी व्यावहारिक रूप से अपना सकें।

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा कि मिलावट, अस्वच्छता या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई का महासंघ पूरी तरह समर्थन करता है। लेकिन कुछ व्यापारियों की गलती के कारण नियमों का पालन करने वाले पारंपरिक खाद्य तेल व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित करना उचित नहीं है।

ठक्कर ने सवाल उठाया, "शराब और सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के बावजूद लाइसेंस और नियमों के तहत बिकते हैं। फिर अधिकृत स्रोत से खरीदे गए, गुणवत्ता और स्वच्छता के नियमों का पालन करने वाले खाद्य तेल को ग्राहक की जरूरत के अनुसार खुले में बेचने पर पूरी तरह रोक क्यों?" उनका कहना है कि खुले तेल की बिक्री को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसे नियमों के दायरे में लाया जा सकता है।

खुले तेल की बिक्री में भी हो सकते हैं कड़े नियम

महासंघ के महामंत्री तरुण जैन ने बताया कि खुले तेल की बिक्री करने वाले व्यापारियों को साफ बर्तन, अलग स्थान, नाप-तौल की व्यवस्था और अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ती है। इसके बावजूद छोटे ग्राहक अपनी जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुसार जितना तेल खरीदना चाहते हैं, उतना ही खरीद सकते हैं।

10, 20 या 30 रुपये का तेल खरीदने वालों की चिंता

महासंघ ने सबसे बड़ा सवाल कम आय वाले परिवारों को लेकर उठाया है। ग्रामीण, आदिवासी और झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कई परिवार अपनी रोज की आय के हिसाब से खाद्य तेल खरीदते हैं।

कई ग्राहकों के लिए एक साथ 500 मिलीलीटर या एक लीटर पैक खरीदना भी अतिरिक्त खर्च हो सकता है। ऐसे में खुले तेल पर रोक और केवल पैकबंद तेल की उपलब्धता से उनकी खरीदारी की मात्रा और खर्च दोनों प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

महासंघ का दावा है कि पैकिंग, लेबलिंग, परिवहन और अन्य लागत जुड़ने से उत्पाद की कीमत बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक कीमत पर असर कितना होगा, यह तेल के ब्रांड, पैकेजिंग और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा, खानदेश क्षेत्र के महासंघ के उपाध्यक्ष प्रकाश पटेल ने कहा कि यदि सभी खाद्य तेलों को अनिवार्य रूप से पैकबंद किया जाता है तो प्लास्टिक, टिन और अन्य पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे अतिरिक्त लागत के साथ पैकेजिंग कचरे और पर्यावरण पर भी असर पड़ने की आशंका है।

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